मुसाफिरखाना में एसडीएम - राजस्व कर्मियों और अधिवक्ताओं के बीच हाथापाई की नाैबत , छावनी बना तहसील परिसर
अमेठी, 02 जनवरी (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के जनपद अमेठी की मुसाफिरखाना तहसील के बार एसोसिएशन के द्वारा पिछले तीन दिनों से एसडीएम का विरोध किया जा रहा है। आज शुक्रवार काे सुबह विरोध प्रदर्शन के दौरान एसडीएम सहित राजस्व कर्मी एवं अधिवक्ता संघ दोनों आमने-सामने हो गए। दोनों के मध्य तीखी नोक झोंक के दौरान धक्का मुक्की और हाथापाई तक हो गई। इसके बाद मामला बिगड़ गया । मौके पर कई थानों की फोर्स बुला ली गई और सीओ ने किसी तरह से मामले को शांत कराया गया। इस दौरान दोनों पक्ष अपने-अपनी मांग को लेकर अड़े हुए हैं।
उल्लेखनीय है कि अधिवक्ताओं के द्वारा पिछले कई दिनों से लगातार एसडीएम अभिनव कनौजिया का विरोध किया जा रहा है। अधिवक्ता न्यायिक कार्य से विरत रहकर एसडीएम के स्थानांतरण की मांग कर रहे हैं। राजस्व कर्मियों का कहना है कि एसडीएम लेखपाल और कानूनगो के साथ एसआईआर की बैठक कर रहे थे। आराेप है कि इसी दाैरान अधिवक्ता नारेबाजी करते हुए कमरे के सामने आ गए। शोर गुल सुनकर का हम लोग जैसे ही बाहर आए ताे अधिवक्ताओं ने धक्का मुक्की करते हुए मारपीट करना शुरू कर दिया। यही नहीं महिला राजस्व कर्मियों का कहना है कि कुछ अधिवक्ताओं के द्वारा उन लोगों को फेसबुक व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम पर उल्टे सीधे कमेंट किए जाते हैं और उनके साथ अभद्र व्यवहार किया जाता है।
दूसरी ओर अधिवक्ताओं का कहना है कि हम अधिवक्ता लोग धरना प्रदर्शन कर रहे थे तभी सामने से राजस्व कर्मी डंडा, हॉकी और अवैध असलहा लेकर उनके ऊपर टूट पड़े। फिलहाल दोनों पक्षों को शांत करने के लिए मौके पर पहुंची पुलिस ने कड़ी मशक्कत के बाद शांति व्यवस्था बनाई। तहसील बार संगठन के अध्यक्ष का कहना है कि एसडीएम जनसुनवाई नहीं करते हैं और कई गंभीर आराेप हैं। अधिवक्ताओं का आराेप है कि ऊपर से नीचे तक के सभी अधिकारी कर्मचारी यहां से स्थानांतरित किए जायं। अगर ऐसा नहीं किया जाता है तो कल से यह धरना प्रदर्शन पूरे जिले में होगा। इस मुद्दे पर एसडीएम अभिनव कनौजिया ने बताया कि कुछ अधिवक्ता के द्वारा महिला राजस्व कर्मियों के साथ बदतमीजी की जाती है। यह लोग कोर्ट नहीं चलने देते हैं। वादकारियों से फीस लेने के बाद उन्हें बताते हैं कि अधिकारी कोर्ट में नहीं बैठे हैं जबकि ये लोग स्वयं कोर्ट का बहिष्कार करते हैं और कोर्ट को चलने ही नहीं देना चाहते हैं।
बहरहाल अब यह मामला वकीलों और एसडीएम के मध्य न रहकर राजस्व कर्मियों तक पहुंच गया है। बड़ी बात यह है कि इस लड़ाई में आम लाेगाें का नुकसान हो रहा है। उनके मुकदमे सुने नहीं जा रहे हैं और वाद का निस्तारण नहीं हो पा रहा है। प्रभावित लाेग बिना किसी काम के ही वापस लाैटने के लिए मजबूर हाेते हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / लोकेश त्रिपाठी