मुंशी प्रेमचंद स्मारक एवं शोध संस्थान की आधिकारिक वेबसाइट का लोकार्पण, लघु फिल्म ‘पंच परमेश्वर’ का प्रदर्शन
—मुंशी प्रेमचंद की पुण्यतिथि पर लमही में ‘प्रेमचंद : पुण्यतिथि स्मरण’ कार्यक्रम
वाराणसी, 08 अक्टूबर (हि.स.)। हिन्दी साहित्य के उपन्यास सम्राट प्रेमचंद की पुण्यतिथि गुरूवार को मुंशी प्रेमचंद स्मारक एवं शोध संस्थान, लमही में मनाई गई। उनके साहित्यिक विरासत, सामाजिक सरोकारों और समकालीन प्रासंगिकता को स्मरण किया गया। शोध संस्थान, लमही व कला संकाय काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के बैनर तले आयोजित ‘प्रेमचंद : पुण्यतिथि स्मरण’ कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान के सहयोग से प्रेमचंद की कालजयी कहानी ‘पंच परमेश्वर’ पर आधारित लघु फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए बीएचयू के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि प्रेमचंद की रचनाओं से जुड़ी पीढ़ी के लिए उनके साहित्य के प्रति विशेष संवेदनशीलता है। उस पीढ़ी ने प्रेमचंद के साहित्य में चित्रित समाज को देखा और जिया है, इसलिए उनकी रचनाएँ आज भी पाठकों के मन में गहराई से रची-बसी हैं। उन्होंने प्रेमचंद से संबंधित वेबसाइट के निर्माण को महत्वपूर्ण पहल बताते हुए कहा कि वेबसाइट का निर्माण पहला चरण है, जबकि उसे निरंतर संवर्धित और समृद्ध करना अगली महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उन्होंने तैयार किए गए अकादमिक कैलेंडर के प्रभावी क्रियान्वयन की आवश्यकता भी बताई।
कुलपति ने कहा कि मुंशी प्रेमचंद की ऐसी मूल पांडुलिपियों को खोजने, संरक्षित करने और उनमें किए गए संपादकीय परिवर्तनों का अध्ययन करने की आवश्यकता है। इससे प्रेमचंद के रचनात्मक विकास और उनकी रचनाओं के पाठ-निर्माण की प्रक्रिया को समझने में महत्वपूर्ण सहायता मिल सकती है। इस अवसर पर बीएचयू कुलसचिव राजन श्रीवास्तव ने कहा कि उनका परिचय प्रेमचंद से किसी औपचारिक अध्ययन के माध्यम से नहीं बल्कि कक्षा चार के विद्यार्थी के रूप में एक मित्र की तरह हुआ। उन्होंने वर्तमान समय के युवा पीढ़ी में पढ़ने की आदत में आ रही कमी और पुस्तकों से बढ़ती दूरी को एक महत्वपूर्ण चुनौती बताया।
उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी तक प्रेमचंद के साहित्य को नए माध्यमों के जरिए पहुँचाने की आवश्यकता है। उन्होंने विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर प्रेमचंद से संबंधित सामग्री उपलब्ध होने को सकारात्मक पहल बताते हुए सुझाव दिया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता की सहायता से प्रेमचंद की कहानियों के पाँच-पाँच मिनट के छोटे-छोटे एपिसोड तैयार किए जा सकते हैं। इन माध्यमों के जरिए उनकी कहानियों को व्यापक रूप से प्रचारित-प्रसारित कर नई पीढ़ी तक पहुँचाया जा सकता है।
इस अवसर पर कला संकाय प्रमुख प्रो. सुषमा घिल्डियाल भी उपस्थित रही कार्यक्रम के अतिथि वक्ता वैभव सिंह ने ‘आधुनिकता और प्रेमचंद’ विषय पर अपने विचार व्यक्त किए। डॉ. ज्योतिष जोशी ने ‘प्रेमचंद और जैनेंद्र : अंतरंग जीवन के साक्ष्य’ विषय पर व्याख्यान दिया। वक्ताओं ने प्रेमचंद के साहित्य, उनके समय, विचारों तथा साहित्यिक योगदान के विभिन्न पक्षों पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम की प्रस्तावना एवं स्वागत वक्तव्य प्रो. नीरज खरे ने प्रस्तुत किया। उन्होंने संस्थान की गतिविधियों तथा प्रेमचंद की साहित्यिक विरासत के संरक्षण और प्रसार की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। डॉ. शिल्पा सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन और संचालन डॉ. विवेक सिंह ने किया।
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हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी