विंध्याचल का अनोखा ‘राम नाम बैंक’, जहां जमा होती है भक्ति की पूंजी

 


मीरजापुर, 26 मार्च (हि.स.)। आस्था की नगरी विंध्याचल में एक अनोखा ‘राम नाम लेखन बैंक’ लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है, जहां धन नहीं बल्कि ‘राम नाम’ की पूंजी जमा की जाती है। वर्ष 2014 से लगातार संचालित इस पहल में भक्त अपनी श्रद्धा से राम नाम लिखकर जमा करते हैं और आध्यात्मिक संतोष प्राप्त करते हैं।

आदिशक्ति मां विंध्यवासिनी धाम के पास संचालित इस बैंक की शुरुआत रामनवमी के दिन प्रभु श्री राम सेवा चैरिटेबल ट्रस्ट के तत्वावधान में हुई थी। संस्थापक महेंद्र पांडेय के अनुसार कलयुग में राम नाम ही वह शक्ति है जो मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाली है। यही कारण है कि यहां लाखों की संख्या में राम नाम लिखी पुस्तिकाएं संग्रहित हो चुकी हैं।

ट्रस्ट की ओर से राम भक्तों को निशुल्क राम नाम लिखने के लिए पुस्तिकाएं दी जाती हैं। इतना ही नहीं, देश के विभिन्न राज्यों राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड और महाराष्ट्र तक कोरियर के माध्यम से ये पुस्तिकाएं मुफ्त भेजी जाती हैं, ताकि अधिक से अधिक लोग इस आध्यात्मिक अभियान से जुड़ सकें।

इस पहल की खास बात यह भी है कि विभिन्न भाषाओं में राम नाम लिखा जा रहा है । सभी धर्मों के लोग इसमें भागीदारी कर रहे हैं। एक मुस्लिम बालिका रजिया ने भी राम नाम लेखन को आत्मिक शांति देने वाला बताते हुए इसमें भाग लिया, जो सामाजिक समरसता की मिसाल बन रहा है। करीब एक दशक से संचालित यह “राम नाम बैंक” श्रद्धा और भक्ति का अनूठा संगम है। इसमें स्मृति बिहानी, गौरव पांडेय, रामलाल साहनी और शिवराम शर्मा जैसे लोग निस्वार्थ भाव से योगदान दे रहे हैं। नवरात्र के दौरान यहां राम नाम पुस्तिकाओं की मांग और भी बढ़ जाती है, जिससे इस अद्भुत पहल की लोकप्रियता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

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हिन्दुस्थान समाचार / गिरजा शंकर मिश्रा