कैकेयी के वरदान से राम को वनवास, दशरथ वियोग के मंचन ने दर्शकों को रुलाया
- तिलठी की रामलीला में दशरथ वियोग और राम-केवट संवाद का भावपूर्ण मंचन, जय श्रीराम के उद्घोष से गूंजा पंडाल
मीरजापुर, 15 अक्टूबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के जनपद मीरजापुर के विकास खंड कोन के तिलठी गांव में श्रीरामलीला समिति की ओर से आयोजित रामलीला के दूसरे दिन बुधवार रात राम वनगमन की लीला का मंचन किया गया। कैकेयी के वरदान, राजा दशरथ के वियोग और राम के वन प्रस्थान के प्रसंग ने दर्शकों को भावुक कर दिया। वहीं, राम-केवट संवाद के मंचन पर पंडाल जय श्रीराम के उद्घोष से गूंज उठा।
लीला के दौरान राजा दशरथ गुरु वशिष्ठ से श्रीराम के राजतिलक की इच्छा जताते हैं। गुरु वशिष्ठ की सहमति के बाद दशरथ मंत्री सुमंत के माध्यम से पूरे राज्य में राम के राजतिलक की घोषणा कराते हैं। इसकी जानकारी होने पर दासी मंथरा रानी कैकेयी को उनके दो वरदानों की याद दिलाती है। कैकेयी कोप भवन में जाकर भरत के लिए राजगद्दी और राम के लिए 14 वर्ष का वनवास मांग लेती हैं।
कैकेयी की मांग सुनकर राजा दशरथ व्याकुल हो उठते हैं, लेकिन वचनबद्ध होने के कारण उन्हें दोनों वरदान स्वीकार करने पड़ते हैं। पिता के वचन की मर्यादा निभाते हुए श्रीराम वन जाने का निर्णय लेते हैं। राम के वियोग में राजा दशरथ के प्राण त्यागने का दृश्य देख दर्शकों की आंखें नम हो गईं। इसके बाद वन में राम और निषादराज की भेंट तथा राम-केवट संवाद का मंचन हुआ। कलाकारों के अभिनय ने कथा के मार्मिक प्रसंगों को जीवंत कर दिया। इस मौके पर समिति के मंच संचालक राजनाथ चौबे, आशुतोष उपाध्याय, पवन उपाध्याय, अंबरीष दुबे, आनंद चौबे, राधाकांत दुबे, टोनी दुबे, प्रभाकर दुबे, आदित्य दुबे और अंकित उपाध्याय सहित बड़ी संख्या में दर्शक मौजूद रहे।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / गिरजा शंकर मिश्रा