स्टार्टअप योजनाओं से जुड़कर युवा जल्द धरातल पर उतारें अपने विचार : प्रो. आनंद कुमार त्यागी
—काशी विद्यापीठ में इंडस्ट्री-अकादमिक सहयोग एवं कौशल विकास पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित
—इंटर्नशिप, औद्योगिक भ्रमण और कौशल विकास के जरिए युवाओं को रोजगार से जोड़ने पर जोर
वाराणसी, 16 अक्टूबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के अर्थशास्त्र विभाग और रामनगर इंडस्ट्रियल एसोसिएशन (आरआईए) के संयुक्त तत्वावधान में शुक्रवार को ‘इंडस्ट्री-अकादमिक कोलैबोरेशन एंड स्किल डेवलपमेंट फॉर अ वन ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी/विकसित उत्तर प्रदेश’ विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला का उद्देश्य उद्योग जगत और शैक्षणिक संस्थानों के बीच सहयोग को बढ़ावा देना, विद्यार्थियों में व्यावहारिक कौशल विकसित करना तथा उत्तर प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने और विकसित प्रदेश के लक्ष्य को हासिल करने में उच्च शिक्षण संस्थानों की भूमिका को मजबूत करना रहा।
नवाचार और उद्यमशीलता को अपनाएं युवा
समाज विज्ञान संकाय के स्मार्ट क्लासरूम में आयोजित कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आनंद कुमार त्यागी ने विद्यार्थियों को नवाचार और उद्यमशीलता की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि युवाओं को विभिन्न स्टार्टअप योजनाओं से जुड़कर अपने विचारों को जल्द से जल्द धरातल पर उतारना चाहिए। दृढ़ संकल्प, मेहनत और निरंतर प्रयास से सफलता हासिल की जा सकती है। उद्योग जगत के सफल उदाहरणों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि मजबूत इच्छाशक्ति और निरंतर प्रयास के बल पर कोई भी व्यक्ति शून्य से शिखर तक का सफर तय कर सकता है। युवाओं को अपने विचारों को व्यावहारिक स्वरूप देने के लिए उपलब्ध अवसरों और संसाधनों का लाभ उठाना चाहिए।
इंटर्नशिप और औद्योगिक भ्रमण में सहयोग का आश्वासन
रामनगर इंडस्ट्रियल एसोसिएशन (आरआईए) के अध्यक्ष दयाशंकर मिश्र ने कर्मठता और व्यावहारिक अनुभव के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने विद्यार्थियों को इंटर्नशिप और औद्योगिक भ्रमण के अवसर उपलब्ध कराने में सहयोग की प्रतिबद्धता जताई। उन्होंने उद्योग जगत और शिक्षण संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया।
कार्यशाला में लघु उद्योग भारती, उत्तर प्रदेश के प्रदेश सचिव राजेश कुमार सिंह और प्रदेश उपाध्यक्ष दीनानाथ बरनवाल ने भी अपने विचार रखे। वक्ताओं ने विद्यार्थियों को उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल विकसित करने तथा रोजगार और उद्यमिता के नए अवसरों का लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित किया।
उद्योग और विश्वविद्यालय के बीच सहयोग बढ़ाने पर जोर
कार्यशाला के दौरान लघु उद्योग भारती, उत्तर प्रदेश के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) को लेकर बैठक भी प्रस्तावित थी। इस पहल का उद्देश्य विश्वविद्यालय और उद्योग जगत के बीच दीर्घकालिक सहयोग की संभावनाओं को विकसित करना है। इसके तहत प्रशिक्षण, इंटर्नशिप, कौशल विकास, उद्यमिता संवर्धन और रोजगारोन्मुख गतिविधियों में आपसी सहयोग को बढ़ावा देने की योजना है।
इंटर्नशिप के लिए निर्धारित हो समयबद्ध योजना
कार्यशाला के प्रारंभ में अर्थशास्त्र विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. अंकिता गुप्ता ने अतिथियों का स्वागत किया और आयोजन के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कार्यशाला को विद्यार्थियों के व्यावहारिक एवं व्यावसायिक विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण बताते हुए उद्योग जगत से आग्रह किया कि विद्यार्थियों की इंटर्नशिप और औद्योगिक प्रशिक्षण के लिए एक निर्धारित समय-सारिणी तैयार की जाए।
उन्होंने कहा कि समयबद्ध योजना के माध्यम से विद्यार्थियों को नियमित रूप से उद्योगों में प्रशिक्षण और व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करने के अवसर मिल सकेंगे। साथ ही, उद्योग और अकादमिक जगत के बीच समन्वय को मजबूत कर विकसित उत्तर प्रदेश के लक्ष्य की प्राप्ति में योगदान दिया जा सकेगा। कार्यशाला में विषय प्रवर्तन प्रो. पारसनाथ मौर्य ने किया, जबकि आयोजन सचिव प्रो. राकेश कुमार तिवारी ने धन्यवाद ज्ञापन किया। सह-आयोजन सचिव डॉ. गंगाधर ने आयोजन संबंधी दायित्वों का निर्वहन किया।
हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी