मीरजापुर : ध्रुव से सुनीति, भरत से सीख और अजामिल से नाम की महिमा का संदेश

 


- भागवत कथा में कथा व्यास ने कहा- अंत समय भगवान का स्मरण ही जीवन को बनाता है सफल

मीरजापुर, 01 अक्टूबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के जनपद मीरजापुर के पहाड़ी विकासखंड के जद्दूपुर गांव में चल रही संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन गुरुवार को कथा व्यास पंडित विष्णुधर द्विवेदी ने ध्रुव चरित्र, भरत चरित्र और अजामिलोपाख्यान का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा सुनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे और भक्ति रस में डूबे रहे।

ध्रुव चरित्र का प्रसंग सुनाते हुए कथा व्यास ने कहा कि मनुष्य को जीवन में सुनीति और सदाचार अपनाना चाहिए। अच्छे संस्कार और नीति ही व्यक्ति को दृढ़ता तथा आध्यात्मिक उन्नति की ओर ले जाती है। उन्होंने ध्रुव के चरित्र से प्रेरणा लेते हुए श्रद्धालुओं को धर्म और भक्ति के मार्ग पर चलने का संदेश दिया।

भरत चरित्र का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि मनुष्य की अंतिम स्मृति उसकी अगली गति का आधार बनती है। महाराज भरत का प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने कहा कि मृत्यु के समय हिरण का स्मरण होने के कारण उन्हें अगले जन्म में हिरण योनि प्राप्त हुई। इसलिए मनुष्य को जीवन में निरंतर भगवान का स्मरण और नाम-संकीर्तन करते रहना चाहिए, ताकि अंतिम समय में भी मन ईश्वर में लगा रहे।

अजामिलोपाख्यान के प्रसंग में उन्होंने कहा कि भगवान के नाम का स्मरण अत्यंत प्रभावशाली है। अजामिल ने पुत्र को पुकारते समय भगवान का नाम लिया और नाम-स्मरण के प्रभाव से उसे भगवत कृपा प्राप्त हुई। उन्होंने कहा कि मानव जीवन दुर्लभ है और इसे सद्कर्म, भक्ति तथा ईश्वर के स्मरण में लगाना चाहिए।

इस अवसर पर मझवां विधायक सुचिस्मिता मौर्य, पंडित श्रीनिवास ओझा, विजय चड्ढा, प्रेम शंकर ओझा, उपनिरीक्षक विनोद शर्मा, धनंजय उपाध्याय, आशुतोष शुक्ला, विनय सिंह, राजेश मिश्रा, विजय शंकर तिवारी, पन्नालाल शुक्ला समेत अन्य लोग मौजूद रहे। समाजसेवी एवं भाजपा नेता प्रसून शुक्ला सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण किया।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / गिरजा शंकर मिश्रा