दशलक्षण पर्व में आत्ममंथन से क्षमावाणी तक, रिश्तों को संवारने का संदेश

 


मीरजापुर, 21 सितंबर (हि.स.)। श्रीपार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर, बाजीराव कटरा और चौबे टोला में 16 सितंबर से चल रहे दशलक्षण महापर्व में आत्मनिरीक्षण, संयम और क्षमावाणी का संदेश दिया जा रहा है। 25 सितंबर तक चलने वाले पर्व में जैन धर्म के दस धर्मों के स्वरूप और उनके जीवन में महत्व पर चर्चा की जा रही है।

पं. अतुल जैन शास्त्री ने बताया कि उत्तम क्षमा, मार्दव, आर्जव, शौच, सत्य, संयम, तप, त्याग, अकिंचन्य और ब्रह्मचर्य व्यक्ति को अपने आचरण की समीक्षा करने की प्रेरणा देते हैं। इनका उद्देश्य जीवन में सकारात्मक बदलाव और आत्मसंयम विकसित करना है।

जैन समाज के वरिष्ठ सदस्य ऋषभ जैन ने कहा कि दशलक्षण पर्व दूसरों की कमियां तलाशने के बजाय स्वयं के दोषों को पहचानने और उनमें सुधार का अवसर देता है। पर्व के समापन पर क्षमावाणी का विशेष महत्व है। इस दौरान लोग जाने-अनजाने हुई भूलों के लिए एक-दूसरे से क्षमा मांगते हैं। इससे आपसी संबंधों में आई दूरियां कम करने और सामाजिक सद्भाव बढ़ाने का संदेश मिलता है। पर्व के दौरान अहिंसा, संयम, त्याग और विश्वबंधुत्व की भावना पर भी जोर दिया जा रहा है। समाज के लोगों के अनुसार, इन मूल्यों को दैनिक जीवन में अपनाना ही पर्व का मुख्य उद्देश्य है।

पर्व में ऋषभ जैन, मनोज जैन, संजीव जैन, विक्रम जैन, विकास जैन, सुमन जैन, किरण जैन, सरिता जैन और चंद्रकांता जैन समेत श्रद्धालु सहभागिता कर रहे हैं।

क्षमा से रिश्तों की नई शुरुआत

क्षमावाणी दशलक्षण पर्व का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसमें जैन समाज के लोग एक-दूसरे से अपनी भूलों के लिए क्षमा मांगते हैं। इसका उद्देश्य मनमुटाव दूर कर आपसी संबंधों को सहज बनाना और समाज में सद्भाव की भावना को मजबूत करना है।

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हिन्दुस्थान समाचार / गिरजा शंकर मिश्रा