मेरठ : सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बीच शासन ने मेडा सचिव अर्पित गुप्ता को हटाया

 


मेरठ, 23 सितंबर (हि.स.)। मेरठ में अवैध निर्माणों के मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बीच राज्य सरकार ने मेरठ विकास प्राधिकरण (मेडा) के सचिव अर्पित गुप्ता को पद से हटा दिया है। उन्हें प्रतीक्षारत किया गया है। सचिव पद पर फिलहाल नई तैनाती नहीं की गई है।

यह घटनाक्रम सुप्रीम कोर्ट में 21 सितंबर को हुई सुनवाई के बाद सामने आया है। शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट से संबंधित मामले की सुनवाई के दौरान मेडा ने जोन-ए में किए गए सर्वे की रिपोर्ट अदालत के समक्ष रखी थी। इसमें 16,726 अनधिकृत निर्माणों का ब्योरा शामिल था। अदालत ने इन संपत्तियों को सील करने के निर्देश दिए थे।

सर्वोच्च अदालत ने मेरठ के अन्य क्षेत्रों में भी स्थिति का सर्वे कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा था। सुनवाई के दौरान जोन-बी, सी और डी से संबंधित रिपोर्ट का विषय भी उठा। अदालत को इन क्षेत्रों में अवैध निर्माण और आवासीय संपत्तियों के व्यावसायिक उपयोग की स्थिति से अवगत कराने तथा अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए। मामले की अगली सुनवाई नौ दिसंबर को होगी।

सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बाद शासन की ओर से मेडा सचिव के स्तर पर यह बदलाव किया गया है। जानकारी के अनुसार, अर्पित गुप्ता को हटाए जाने की कार्रवाई को अदालत में अवैध निर्माणों से संबंधित रिपोर्ट और अनुपालन की प्रक्रिया से जोड़कर देखा जा रहा है।

अर्पित गुप्ता ने मई में मेडा सचिव का कार्यभार संभाला था। इससे पहले वह अमेठी में अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) के पद पर कार्यरत थे। मेडा में उनकी तैनाती के बाद अवैध निर्माणों से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन की प्रक्रिया आगे बढ़ी।

उधर, मेडा उपाध्यक्ष संजय कुमार मीणा के चिकित्सा अवकाश पर होने की भी जानकारी सामने आई है। सचिव को हटाए जाने और नए अधिकारी की नियुक्ति नहीं होने के बीच प्राधिकरण के प्रशासनिक कामकाज की अगली व्यवस्था पर भी नजर है।

मेरठ में अवैध निर्माणों का मामला सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में होने के कारण जोनवार सर्वे, चिन्हित संपत्तियों पर कार्रवाई और अदालत में अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने की प्रक्रिया आने वाले दिनों में महत्वपूर्ण रहेगी।

हिन्दुस्थान समाचार / मोहित वर्मा