पंचनद धाम में मकर संक्रांति पर उमड़ी आस्था , हजारों श्रद्धालुओं ने पंचनद धाम में लगाई पुण्य की डुबकी
औरैया, 15 जनवरी (हि. स.)। मकर संक्रांति के पावन पर्व पर उत्तर प्रदेश के जनपद औरैया, जालौन और इटावा की सीमा पर स्थित प्रसिद्ध तीर्थ स्थल पंचनद धाम में आज आस्था का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। तड़के ब्रह्म मुहूर्त से ही श्रद्धालुओं का जनसैलाब पंचनद संगम की ओर उमड़ पड़ा। पांच नदियों के संगम पर स्थित इस पवित्र धाम में स्नान करने के लिए हजारों श्रद्धालु इटावा, औरैया, जालौन, भिंड सहित आसपास के जनपदों और अन्य प्रदेशों से पहुंचे।
सूर्योदय से पहले ही संगम तट पर श्रद्धालुओं की कतारें लग गईं। ठंड के बावजूद श्रद्धा और विश्वास ने भक्तों के कदम नहीं डगमगाने दिए। “हर-हर गंगे” और “जय बाबा साहब ” के जयकारों से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो उठा। श्रद्धालुओं ने संगम में पवित्र स्नान कर दान-पुण्य किया और मंदिर में पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। पंचनद धाम का धार्मिक महत्व पांच नदियों के संगम के कारण अत्यंत विशेष माना जाता है। मान्यता है कि मकर संक्रांति के दिन यहां स्नान करने से जीवन के पाप कटते हैं और पुण्य की प्राप्ति होती है। इसी विश्वास के चलते हर वर्ष इस पर्व पर यहां श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ जाती है।
मंदिर के महंत सुमेर वन ने बताया कि मकर संक्रांति पर स्नान का विशेष महत्व है। उन्होंने कहा कि स्नान सुबह ब्रह्म मुहूर्त से शुरू हो गया था, जो शाम चार बजे तक जारी रहेगा। अब तक हजारों श्रद्धालु संगम में आस्था की डुबकी लगा चुके हैं । श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन द्वारा सुरक्षा और व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। पुलिस बल की तैनाती के साथ-साथ स्वयंसेवकों ने भी श्रद्धालुओं को स्नान घाट तक पहुंचाने और भीड़ नियंत्रण में अहम भूमिका निभाई। स्थानीय ग्रामीणों ने भी बाहर से आए भक्तों की सेवा में सहयोग किया।
मकर संक्रांति के अवसर पर पंचनद धाम में श्रद्धा, विश्वास और परंपरा का संगम देखने को मिला। यह पर्व न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक विरासत को भी सशक्त करता नजर आया।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुनील कुमार