हिन्दी भाषा का इस जग में नहीं है कोई सानी,मुझे गर्व है कहने को मैं हूं एक हिंदुस्तानी : प्रतीक्षा तिवारी

 








महोबा, 14 सितंबर (हि.स.)। यूपी के महोबा जनपद के चरखारी कस्बा स्थित प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज में सोमवार को राष्ट्रीय हिन्दी दिवस के अवसर पर भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में हिन्दी की बारीकियों और इसकी आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए हिन्दी दिवस का महत्व बताया गया है।

सोमवार को चरखारी कस्बा स्थित सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज में राष्ट्रीय हिन्दी दिवस पर आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीं विद्यालय की आचार्य दीदी प्रतीक्षा तिवारी ने अपनी स्वरचित कविता बच्चों को सुनाई। उन्होंने कहा कि जहां बघेली बुंदेली है, अवधी खुद में अलबेली है। कन्नड़ और मराठी जिसमें, वेदों की परिपाटी, जिसमें तमिल तेलुगु बंगाली हैं, ब्रज भाषा ममता वाली है। कश्मीरी है, गुजराती है, हर भाषा इज्जत पाती है। हिन्दी भाषा का इस जग में नहीं है कोई सानी। मुझे गर्व है कहने को मैं हूं एक हिंदुस्तानी। ये कविता सुनाकर उन्होंने गागर में सागर भरते हुए हिन्दी भाषा को सभी भाषाओं की मातृभाषा बताया है। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में आचार्य दीदी निधि तिवारी ने कहा कि 14 सितंबर 1949 को हिन्दी को राजभाषा का दर्जा मिला था। हिन्दी हमारे देश की आत्मा है, इसे बोलने में गर्व महसूस करना चाहिए।

आचार्य रामशरण ने छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय हिन्दी दिवस के इतिहास, महत्व और हिन्दी भाषा की गरिमा पर गहनता से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि हिन्दी केवल भाषा नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति और संस्कारों की पहचान है। इसे अपनाना और सम्मान देना हर भारतीय का कर्तव्य है।

छात्र-छात्राओं ने कविता, भाषण और दोहों के माध्यम से हिन्दी के प्रति प्रेम व्यक्त किया। इस दौरान विद्यालय के भैया-बहनों ने हिन्दी दिवस पर कविता, भाषण और निबंध के माध्यम से अपने विचार रखे। कार्यक्रम में विद्यालय परिवार के सभी आचार्य बंधु और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / उपेन्द्र द्विवेदी