ख्यातिप्राप्त कलाकारों की कथक प्रस्तुतियों से यादगार बना उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी का “नमन” समारोह
लखनऊ, 01 सितंबर (हि.स.)। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कला संवर्धन-संरक्षण की नीति के अनुपालन में एवं संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह की प्रेरणा व मार्गदर्शन में तथा उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी के अध्यक्ष प्रो. जयंत खोत, उपाध्यक्ष विभा सिंह एवं निदेशक राज कुमार की कुशल परिकल्पना एवं संयोजन में उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी, लखनऊ (संस्कृति विभाग, उत्तर प्रदेश) एवं कथक केन्द्र, लखनऊ द्वारा सुविख्यात कथकाचार्य पं. लच्छू महाराज की स्मृति में दो दिवसीय पारम्परिक कथक नृत्य कार्यक्रम “नमन” परम्परा का आयोजन 31 अगस्त और 01 सितम्बर 2026 को किया गया।
समारोह के मुख्य अतिथि पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात (आई.ए.एस.) रहे। उद्घाटन सत्र में कथकाचार्य पं. लच्छू महाराज को पुष्पांजलि के उपरांत विशिष्ट अतिथि के रूप में उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी की पूर्व अध्यक्ष एवं वरिष्ठ कथक नृत्यांगना प्रो. पूर्णिमा पाण्डे, आकाशवाणी केन्द्र लखनऊ की कार्यक्रम प्रमुख सुमोना एस. पाण्डेय एवं बिरजू महाराज कथक संस्थान की उपाध्यक्षा डॉ. मिथिलेश तिवारी का स्वागत अकादमी के अध्यक्ष प्रो. जयंत खोत, उपाध्यक्ष विभा सिंह एवं निदेशक राज कुमार द्वारा किया गया। इस अवसर पर अपने सम्बोधन में अकादमी के अध्यक्ष प्रो. जयंत खोत ने नारी शक्ति को प्रणाम करते हुए बताया कि इस समारोह में भी महिला सशक्तीकरण को महत्व दिया गया है।
दो दिवसीय नमन कार्यक्रम की पहली संध्या पर सोमवार को लखनऊ स्थित कथक केन्द्र की एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियां हुई। नायिका प्रसंग की कथक प्रस्तुति में नायिका-भेद को खूबसूरती के साथ पेश किया गया। इसमें कलाकारों ने नायिका के विभिन्न भावों जैसे प्रेम, विरह, मान, प्रतीक्षा, मिलन को परिपक्वता के साथ पेश किया। इस प्रस्तुति का नृत्य निर्देशन नीता जोशी द्वारा किया गया था। इसमें सृष्टि प्रताप, अदिति जायसवाल, केसर सिंह, वैष्णवी अग्निहोत्री, मानवी वर्मा, स्वरा त्रिपाठी, अंशिका कटियार, दिविक्शा तिवारी, अगन्या कटियार, शिखा शाह, वंदना वर्मा, ईशनूर कौर, वारन्या मेहरोत्रा, नंदिनी श्रीवास्तव ने प्रतिभाग किया।
मीराबाई के लोकप्रिया भजन ्पायो जी मैंने राम रतन धन पायो पर मौसम, एकता कश्यप, सृष्टि पांडे, मौलिषा मिश्रा, साक्षी यादव, प्रिशा यादव, आद्रिजा और आद्विका अवस्थी ने मनोरम नृत्य किया। श्रुति शर्मा के निर्देशन में प्रस्तुत इस भजन में चक्कर, तिहाई और पदसंचालन के साथ भाव पक्ष भी सशक्त रहा। ‘कृष्ण नमन’ में कथक केंद्र की छात्राओं ने कृष्ण स्तुति, कवित्त, टुकड़े तिहाई, परन पेश कर प्रशंसा हासिल की। इस प्रस्तुति का नृत्य निर्देशन रजनी वर्मा ने किया था। इसमें पूजा, अवंतिका, आरती, आकृति, कनक, किंजल, हंसिका, अंशिका, पूनम, अक्षिता और कमलेश ने उत्साह के साथ भाग लिया। इन प्रस्तुतियों में संगीत निर्देशन एवं गायन का दायित्व कमलकांत ने अदा किया। इसके साथ ही तबला वादन डॉ. राजीव शुक्ला-शहनवाज खान, सारंगी वादन अर्चना, बांसुरी वादन दिगंत सैकिया और सितार वादन डॉ. नवीन मिश्रा ने किया।
पुणे की लोकप्रिय कथक नृत्यांगना आभा औटी ने गणेश वंदना स्तुति “सिन्दूर वदना” के उपरांत गुरु परंपरा का अनुसरण करते हुए साढ़े सात मात्रा की विशेष रचना नील पेश कर वाहवाही अर्जित की। दोहे की परंपरा के तहत उन्होंने “सूर्य छिपे अदरी बदरी, अरु चन्द्र छिपे जो अमावस आए” को अत्यंत प्रभावी रूप में प्रस्तुत किया। अंत में उन्होंने उत्तर प्रदेश की होली परंपरा को जीवंत करते हुए “देखो होरी के खिलैया” पेश किया तो प्रेक्षागृह तालियों से गूंज उठा। प्रयागराज की वरिष्ठ कथक नृत्यांगना उर्मिला शर्मा ने शिव वंदना “डमरू हर केर बाजे” के उपरांत कथक का पारंपरिक स्वरूप अत्यंत सुंदरता के साथ प्रस्तुत किया। अंत में उन्होंने महाराज बिंदादीन जी द्वारा रचित लोकप्रिय ठुमरी “डगर चलत देखो श्याम कर गहियाँ” पर सुंदर भाव पक्षों का प्रदर्शन कर प्रशंसा अर्जित की। उनके साथी कलाकार पं. पूरन मिश्रा, मंजीत कुमार, अनिल कुशवाहा, शुभंकर शर्मा उन्नति मिश्रा ने प्रस्तुति का आकर्षण बढ़ाया। अहमदाबाद के मौलिक शाह ने शिव स्तुति के उपरांत तीन ताल में पारंपरिक कथक किया। अंत में उन्होंने लोकप्रिय ठुमरी “पीत पटवारे ने मरोड़ डारी बहिया” पर सशक्त भावों का प्रदर्शन किया।
इस क्रम में मंगलवार को कथक केन्द्र, लखनऊ की प्रस्तुति से संध्या का आगाज हुआ। नीता जोशी के निर्देशन में गुरु कृपा की आकर्षक प्रस्तुति हुई। इसमें सृष्टि प्रताप, अदिति जायसवाल, केसर सिंह, वैष्णवी अग्निहोत्री, मानवी वर्मा, स्वरा त्रिपाठी, अंशिका कटियार, दिविक्शा तिवारी, अगन्या कटियार, शिखा शाह, वंदना वर्मा, ईशनूर कौर, वारन्या मेहरोत्रा, नंदिनी श्रीवास्तव, पृथा सिंह, सिद्धीक्षा पांडे, समृद्धि पुनिया, अरायना सिंह, ईशानी द्विवेदी ने भाग लिया।
इसके उपरांत लखनऊ की प्रतिष्ठित कथक गुरु एवं नृत्यांगना डॉ. रुचि खरे ने ध्रुपद अंग से अपनी प्रस्तुति की शुरुआत की। इसकी रचना विश्वविख्यात कथक कलाकार पंडित राजेंद्र गंगानी जी ने की है। इसके बोल थे “शंकर अति प्रचंड, नाचत कर डमरू बाजे।” यह रचना राग मालकौंस में निबद्ध थी। इसके बाद परंपरागत कथक नृत्य के अंतर्गत प्राचीन बंदिशों जैसे ठाट, आमद, परन, तिश्न जाती में ज़रब, यति, गत निकास के अंतर्गत रुखसार और दुर्गा परन आदि की मनोहारी प्रस्तुतियां देखने को मिली। तृतीय प्रस्तुति अष्टपदी थी जिसके बोल थे “निरतत ढंग”। इस प्रस्तुति में डॉ. रुचि के साथ उनकी प्रतिभाशाली शिष्याओं वैभवी मिश्रा, वैभव लक्ष्मी, मिल्की गुप्ता, रुनझुन सिंह, अत्रांशी सिंह, श्वेता गुप्ता, शैलेन्द्र सिंह कुशवाहा, तनिष्का सक्सेना एवं गार्गी राजगंगा ने भी अपनी तैयारी का सुंदर प्रदर्शन किया। इस क्रम में डॉ. रुचि के निर्देशन में उनके शिष्यों द्वारा मत्त ताल अठारह मात्रा में पेश की गई। इसमें विलंबित एवं मध्य लय में कथक के बोल बंदिशों, लयकारी और नृत्य-सौंदर्य का मनोरम अनुभव दर्शकों ने किया।
अंत में उनके द्वारा अत्यंत लोकप्रिय एवं भावपूर्ण दादरा “कोयलिया मत कर पुकार।” पेश किया गया। बताते चलें कि इस रचना को पद्मश्री बेगम अख्तर ने अपनी विशिष्ट गायकी से अमर कर दिया है। सहयोगी दल में गायन एवं संगीत निर्देशन का दायित्व मो.इलियास खान ने अदा किया। इस क्रम में तबले पर डॉ. राजीव शुक्ला, सारंगी पर जीशान अब्बास, बाँसुरी पर उदित राज शंकर, सितार पर शुभांकर शर्मा, सह-वाद्य पर उज्ज्वला शर्मा एवं पढ़ंत पर अनिर्वाण तालुकदार ने सहयोग किया।
इंदौर की डॉ. सुमित्रा हरमलकर ने सर्वप्रथम प्रथम देव गणेश की स्तुति की। तत्पश्चात ताल त्रिताल में ताल नर्तन प्रस्तुत किया जिसमें रायगढ़ घराने की विशिष्ट बंदिशों का समावेश किया गया था। अभिनय के अंतर्गत कृष्ण भक्त कवि सूरदास के पद से अपनी प्रस्तुति का समापन किया। तबले पर मृणाल नागर, गायन एवं हारमोनियम पर मन मटाई, सारंगी पर उस्ताद जीशान अब्बास और पढ़न्त आपकी शिष्या डॉ. योगिता मंडलिक ने प्रभावी संगत दी।
इसके साथ ही पुणे के डॉ नंदकिशोर कपोते एवं मेरठ की प्रो. (डॉ.) भावना ग्रोवर की प्रस्तुतियों ने भी दर्शकाें का दिल जीत लिया। सतरंगी छतरी और फूलों से सजे परिसर की सजावट भी देखते ही बनी।
हिन्दुस्थान समाचार / मोहित वर्मा