पशुधन की सेहत, नस्ल और उत्पादन पर देशभर के विशेषज्ञ करेंगे मंथन

 


- बीएचयू के दक्षिणी परिसर में 5-6 अक्टूबर को राष्ट्रीय सम्मेलन

- जीनोमिक्स से लेकर जलवायु अनुकूल पशुपालन तक पर चर्चा

मीरजापुर, 02 अक्टूबर (हि.स.)। बदलती जलवायु और पशुपालन की बढ़ती जरूरतों के बीच पशुओं की नस्ल, पोषण, स्वास्थ्य और उत्पादकता को बेहतर बनाने के वैज्ञानिक उपायों पर देशभर के विशेषज्ञ मंथन करेंगे। बीएचयू के राजीव गांधी दक्षिणी परिसर बरकछा में पांच और छह अक्टूबर को पशु शरीर क्रिया विज्ञान से जुड़े राष्ट्रीय सम्मेलन और संगोष्ठी का आयोजन होगा।

पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान संकाय के पशु चिकित्सा शरीर क्रिया विज्ञान एवं जैव रसायन विभाग की ओर से पशु शरीर क्रिया वैज्ञानिक संघ के सहयोग से होने वाले सम्मेलन में देश के विभिन्न संस्थानों के वैज्ञानिक और विशेषज्ञ शामिल होंगे। इसमें पशुधन की आनुवंशिक क्षमता बढ़ाने के साथ देशी नस्लों के संरक्षण और सुधार पर चर्चा होगी।

सम्मेलन में जीनोमिक्स और न्यूट्रिजीनोमिक्स के जरिए पशुओं के स्वास्थ्य एवं उत्पादन क्षमता को समझने, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव से पशुधन को बचाने और डेयरी उत्पादन को टिकाऊ बनाने जैसे विषय प्रमुख रहेंगे। तनाव शरीर क्रिया विज्ञान, प्रजनन, सहायक प्रजनन तकनीक और सटीक पशुधन पालन पर भी वैज्ञानिक अपने शोध साझा करेंगे।

संकाय अधिष्ठाता प्रो. (डा.) अमित राज गुप्ता के अनुसार सम्मेलन का विषय ‘सतत पशुधन उत्पादकता की दिशा में पशु शरीर क्रिया विज्ञान के उभरते प्रतिमान : विकसित भारत की ओर’ रखा गया है। इसमें नवीन अनुसंधान और तकनीकी पहलुओं पर विचार-विमर्श होगा। सम्मेलन में बीएचयू के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी मुख्य अतिथि और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एनिमल बायोटेक्नोलॉजी के निदेशक डा. रवि कुमार गांधम विशिष्ट अतिथि होंगे।

हिन्दुस्थान समाचार / गिरजा शंकर मिश्रा