साल में एक दिन खुलता है कानपुर का दशानन मंदिर, विजयादशमी पर होंगे रावण के दर्शन

 


कानपुर, 19 अक्टूबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश जनपद कानपुर के शिवाला स्थित दशानन मंदिर में विजयादशमी पर रावण की पूजा के लिए श्रद्धालु जुटेंगे। फूलमंडी की संकरी गलियों में बने इस मंदिर के कपाट साल में केवल एक बार दशहरे पर खोले जाते हैं। यहां रावण के दर्शन के साथ उसकी विद्वता का स्मरण किया जाता है, वहीं उसके अहंकार के अंत से मिलने वाली सीख भी याद दिलाई जाती है। मंगलवार को मंदिर के पट खुलने के साथ ही श्रद्धालुओं को दर्शन का मौका मिलेगा।

मंदिर में दर्शन शुरू होने से पहले परिसर की सफाई की जाएगी। इसके बाद रावण की प्रतिमा का दूध, दही, घी, शक्कर, पंचामृत और गंगाजल से अभिषेक किया जाएगा। फूल चढ़ाकर आरती की जाएगी। मंदिर के पुजारी राम बाजपेई के अनुसार, मंगलवार सुबह सात बजे कपाट खोलने की तैयारी है। पूजन संपन्न होने के बाद श्रद्धालु प्रतिमा के दर्शन कर सकेंगे।

दशानन मंदिर में पूजा करने आने वाले श्रद्धालु सरसों के तेल का दीपक जलाते हैं और तरोई के फूल अर्पित करते हैं। मान्यता है कि यहां पूजा करने से बच्चों को बल, बुद्धि और विद्या का आशीर्वाद मिलता है। परिवार की सुख-समृद्धि के लिए भी भक्त प्रार्थना करते हैं। रावण को प्रकांड विद्वान माना जाता है, इसलिए उसकी विद्वता से जुड़ी मान्यताओं के चलते भी मंदिर में पूजा का विशेष महत्व है।

पुजारी राम बाजपेयी ने सोमवार को बताया कि यह मंदिर लगभग 200 साल प्राचीन है और इसकी देखरेख श्याम बाजपेयी ट्रस्ट करता है। विजयादशमी पर यहां रावण का जन्मदिन भी मनाया जाता है। मंदिर में रावण की पूजा और शहर में उसका पुतला जलाने की परंपरा एक साथ दिखाई देती है। इसके पीछे संदेश यह है कि ज्ञान और विद्वता के बावजूद अहंकार व्यक्ति के पतन का कारण बन सकता है। दशहरे पर रावण दहन भी इसी अहंकार के अंत का प्रतीक माना जाता है।

मंदिर के कपाट खुलने के बाद श्रद्धालु दर्शन और पूजन कर सकेंगे। विजयादशमी की परंपरा पूरी होने पर मंदिर फिर बंद कर दिया जाएगा। इसके बाद भक्तों को रावण के दर्शन के लिए अगले साल दशहरे तक इंतजार करना पड़ेगा। यही विशेष परंपरा कानपुर के इस मंदिर को शहर के अन्य धार्मिक स्थलों से अलग पहचान देती है।

हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप