मीरजापुर: गांव-गांव कैंप लगाकर टीबी की पहचान और जागरूकता बढ़ाएं: अनुप्रिया पटेल

 


मीरजापुर, 19 अगस्त (हि.स.)। केंद्रीय राज्यमंत्री स्वास्थ्य, परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक अनुप्रिया पटेल ने बुधवार को मीरजापुर कलेक्ट्रेट सभागार में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि टीबी की पहचान और उपचार के लिए गांव-गांव में नियमित स्वास्थ्य कैंप लगाए जाएं और लोगों को बीमारी के लक्षण, बचाव एवं उपचार के प्रति जागरूक किया जाए।

केंद्रीय राज्यमंत्री ने कहा कि टीबी मरीजों को सरकार की ओर से निःशुल्क जांच और उपचार की सुविधा दी जा रही है। इलाज के दौरान मिलने वाली प्रतिमाह एक हजार रुपये की सहायता राशि का उपयोग मरीज पौष्टिक आहार के लिए करें। उन्होंने कहा कि दवा समय से लेने के साथ पौष्टिक भोजन करना टीबी से पूरी तरह स्वस्थ होने में महत्वपूर्ण है।

उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया कि गांवों में लगाए जाने वाले कैंप में ग्राम प्रधान और नगरीय क्षेत्रों में सभासदों को भी शामिल किया जाए। लक्षण वाले व्यक्तियों की जांच कर उनका पंजीकरण कराया जाए और आवश्यकता पड़ने पर तत्काल उपचार शुरू किया जाए। उन्होंने कहा कि 100 दिन के अभियान के बाद भी टीबी की पहचान और उपचार का अभियान लगातार जारी रहना चाहिए।

केंद्रीय राज्यमंत्री ने जिले में टीबी मरीजों का उपचार कर रहे निजी चिकित्सकों से मरीजों की जानकारी लेकर संबंधित पोर्टल पर अपडेट कराने के निर्देश भी दिए। उन्होंने टीबी चैम्पियन और ट्रीटमेंट सपोर्टर जैसे लोगों को कार्यक्रमों में सम्मानित करने की बात कही।

समीक्षा के बाद केंद्रीय राज्यमंत्री ने आईएमए के सौजन्य से उपलब्ध कराई गई पोषण पोटली 21 टीबी मरीजों को वितरित की। उन्होंने उपस्थित लोगों को भारत को टीबी मुक्त बनाने में सहयोग करने का संकल्प भी दिलाया। कहा कि सामूहिक प्रयास से निश्चित रूप से टीबी हारेगा और देश जीतेगा।

बैठक में जिलाधिकारी पवन कुमार गंगवार, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. कीर्ति कुमार मिश्रा, डिप्टी सीएमओ डॉ. मुकेश प्रसाद, आईएमए अध्यक्ष डॉ. एचपी सिंह, डॉ. एसएन पाठक, डॉ. अंजनी श्रीवास्तव सहित स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी, पीएचसी-सीएचसी प्रभारी, डीपीएम, क्षय विभाग के कर्मचारी और अपना दल (एस) के पदाधिकारी मौजूद रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / गिरजा शंकर मिश्रा