गोरखपुर : बौद्ध संग्रहालय में सजी अंतरराष्ट्रीय ललित कला प्रदर्शनी, मंडलायुक्त ने किया उद्घाटन

 
















गोरखपुर, 21 अगस्त (हि.स.)। बौद्ध संग्रहालय परिसर में आयोजित गोरखपुर अंतरराष्ट्रीय ललितार्जन चित्रकला प्रदर्शनी का शुक्रवार को मंडलायुक्त इन्द्र विक्रम सिंह ने विधिवत उद्घाटन किया। उद्घाटन के बाद मंडलायुक्त ने प्रदर्शनी में प्रदर्शित विभिन्न चित्रों और कलाकृतियों का अवलोकन किया तथा कलाकारों की रचनात्मकता और कलात्मक अभिव्यक्ति की सराहना की। इस अवसर पर उन्होंने कला, संस्कृति और इतिहास के संरक्षण एवं उनके व्यापक प्रचार-प्रसार को समाज के लिए महत्वपूर्ण बताया।

मंडलायुक्त इन्द्र विक्रम सिंह ने प्रदर्शनी में लगाए गए विभिन्न चित्रों को बारीकी से देखा और उनके विषय, भाव, शैली तथा कलाकारों की रचनात्मक सोच के संबंध में जानकारी प्राप्त की। प्रदर्शनी में अलग-अलग भावों, विषयों और कलात्मक शैलियों से संबंधित चित्रों को एक ही स्थान पर प्रदर्शित किया गया है। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के लिए बेहतर मंच उपलब्ध कराने के साथ ही आम लोगों और युवा पीढ़ी को कला एवं संस्कृति से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

मंडलायुक्त ने प्रदर्शनी के आयोजन से जुड़े पदाधिकारियों से विभिन्न चित्रों और आयोजन की रूपरेखा के बारे में जानकारी ली। उन्होंने कहा कि चित्रकला केवल रंगों और रेखाओं का संयोजन नहीं, बल्कि कलाकार के विचारों, भावनाओं और कल्पनाशीलता को समाज तक पहुंचाने का प्रभावी माध्यम है। अंतरराष्ट्रीय स्तर के कलाकारों और विभिन्न कलात्मक अभिव्यक्तियों को एक मंच पर लाने वाले ऐसे आयोजनों से गोरखपुर की सांस्कृतिक पहचान को भी मजबूती मिलती है।

प्रदर्शनी के अवलोकन के बाद मंडलायुक्त ने बौद्ध संग्रहालय का निरीक्षण किया। संग्रहालय के निदेशक यशवंत सिंह राठौर ने मंडलायुक्त को संग्रहालय की विभिन्न दीर्घाओं और वहां संरक्षित ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक सामग्री के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बौद्ध धर्म, भगवान गौतम बुद्ध के जीवन, उनकी शिक्षाओं तथा बौद्ध संस्कृति से जुड़े विभिन्न पहलुओं के संबंध में भी मंडलायुक्त को अवगत कराया।

निदेशक यशवंत सिंह राठौर ने संग्रहालय में संरक्षित महत्वपूर्ण वस्तुओं और बौद्धकालीन विरासत के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि संग्रहालय में इतिहास, कला और संस्कृति से संबंधित अनेक महत्वपूर्ण सामग्री संरक्षित है। मंडलायुक्त ने संग्रहालय में प्रदर्शित सामग्री को रुचि के साथ देखा और उनके ऐतिहासिक महत्व के बारे में जानकारी प्राप्त की।

निरीक्षण के दौरान मंडलायुक्त ने विशेष रूप से गौतम बुद्ध के जीवन और उनकी शिक्षाओं से संबंधित प्रदर्शित सामग्री का अवलोकन किया। उन्होंने बुद्ध के जीवन दर्शन, शांति, करुणा, अहिंसा और मानव कल्याण के संदेश से जुड़े विभिन्न पहलुओं के बारे में जानकारी ली। उन्होंने कहा कि भगवान बुद्ध की शिक्षाएं आज भी पूरी दुनिया के लिए प्रासंगिक हैं और उनकी विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाना आवश्यक है।

मंडलायुक्त ने संग्रहालय परिसर में एक बिंदु पर लगाए गए प्रदर्शनी स्थल का भी निरीक्षण किया। उन्होंने आयोजन से जुड़े अधिकारियों एवं समिति के पदाधिकारियों से प्रदर्शनी की विशेषताओं के बारे में जानकारी प्राप्त की। उन्होंने कहा कि कला और पुरातत्व को एक साथ प्रस्तुत करने से लोगों को हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को समझने का अवसर मिलता है।

उन्होंने संग्रहालय की व्यवस्थाओं का भी जायजा लिया तथा वहां आने वाले पर्यटकों और दर्शकों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं के संबंध में जानकारी प्राप्त की। उन्होंने कहा कि गोरखपुर में धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण अनेक स्थल हैं, जिन्हें बेहतर ढंग से लोगों के सामने लाने की आवश्यकता है।

कार्यक्रम में व्यापारी कल्याण बोर्ड के उपाध्यक्ष एवं दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री पुष्प दंत जैन, दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. पूनम टंडन सहित आयोजन समिति के अन्य पदाधिकारी एवं संबंधित लोग मौजूद रहे। अतिथियों ने भी प्रदर्शनी का अवलोकन किया और प्रदर्शित कलाकृतियों के संबंध में जानकारी प्राप्त की।

आयोजकों ने बताया कि प्रदर्शनी का उद्देश्य चित्रकला और कला की विभिन्न विधाओं को एक मंच पर लाना तथा कलाकारों को अपनी रचनात्मक प्रतिभा प्रस्तुत करने का अवसर उपलब्ध कराना है। प्रदर्शनी में कला प्रेमियों, विद्यार्थियों, शोधार्थियों और आम नागरिकों के लिए विभिन्न प्रकार की कलाकृतियां आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं।

मंडलायुक्त ने प्रदर्शनी के सफल आयोजन के लिए आयोजन समिति को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि गोरखपुर में कला, संस्कृति, साहित्य और ऐतिहासिक विरासत से जुड़े आयोजनों की निरंतरता बनी रहनी चाहिए। ऐसे कार्यक्रम शहर की सांस्कृतिक पहचान को समृद्ध करने के साथ ही नई पीढ़ी को अपनी विरासत और कलात्मक परंपराओं से जोड़ने का कार्य करते हैं।

बौद्ध संग्रहालय के निरीक्षण और अंतरराष्ट्रीय ललित कला प्रदर्शनी के उद्घाटन के दौरान कला, संस्कृति और इतिहास का सुंदर समागम देखने को मिला। एक ओर जहां विभिन्न कलाकारों की कलाकृतियों ने कला प्रेमियों का ध्यान आकर्षित किया, वहीं दूसरी ओर बौद्ध संग्रहालय में संरक्षित ऐतिहासिक सामग्री ने लोगों को प्राचीन भारतीय संस्कृति और गौतम बुद्ध के जीवन दर्शन से परिचित कराया। मंडलायुक्त का यह दौरा गोरखपुर की कला एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और उसके व्यापक प्रचार-प्रसार की दिशा में महत्वपूर्ण माना गया।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रिंस पाण्डेय