पिंडदान से पहले रामगया घाट पर सुरक्षा इंतजाम अधूरे, श्रद्धालुओं की बढ़ेगी मुश्किल

 


मीरजापुर, 25 सितंबर (हि.स.)। पितृपक्ष में 26 सितंबर से रामगया घाट पर पिंडदान और तर्पण शुरू होगा। विंध्याचल क्षेत्र के इस प्रमुख घाट पर पितरों का श्राद्ध करने के लिए प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग पहुंचेंगे, लेकिन फिलहाल घाट पर व्यवस्थाएं नदारद हैं। गंगा का जलस्तर बढ़ने से घाट पर जगह भी कम हो गई है।

रामगया घाट के दोनों ओर कीचड़ जमा है। घाट पर बैरिकेडिंग नहीं होने से श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी हुई है। शिवपुर बाजार से घाट तक जगह-जगह गंदगी और कीचड़ है। शौचालय और पेयजल की व्यवस्था भी नहीं है। ऐसे में पिंडदानियों को घाट तक पहुंचने और अनुष्ठान करने में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

घाट पर पिंडदान के लिए एक चबूतरा ही प्रमुख सहारा है। इसके अलावा चबूतरे के पास पेड़ पर लटका जर्जर टीन शेड भी खतरा बना हुआ है। स्थानीय लोगों के अनुसार पितृपक्ष के दौरान यहां लगातार 15 दिनों तक तर्पण और पिंडदान होता है। अमावस्या के दिन भीड़ और बढ़ जाती है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि इस बार घाट पर पर्याप्त साफ-सफाई नहीं कराई गई है। बैरिकेडिंग और जमा सिल्ट की सफाई भी नहीं हुई है। पितृपक्ष शुरू होने में अब समय कम है। ऐसे में श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए घाट की सफाई, बैरिकेडिंग, पेयजल और शौचालय की व्यवस्था जल्द दुरुस्त किए जाने की जरूरत है।

नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी जी. लाल ने बताया कि पितृपक्ष को देखते हुए रामगया घाट पर साफ-सफाई और श्रद्धालुओं की सुविधा से जुड़े इंतजामों की समीक्षा की जा रही है। घाट पर सुरक्षा व्यवस्था, बैरिकेडिंग, पेयजल और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए संबंधित कर्मचारियों को निर्देश दिए जाएंगे।

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हिन्दुस्थान समाचार / गिरजा शंकर मिश्रा