कूटरचित दस्तावेज से नौकरी हासिल करने के दाेषी काे सात साल की सजा
मीरजापुर, 03 नवंबर (हि.स.)। धोखाधड़ी और कूटरचित दस्तावेज तैयार कर नौकरी हासिल करने के मामले में अदालत ने आरोपी को दाेषी करार देते हुए सात वर्ष के साधारण कारावास और 20 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड अदा नहीं करने पर दाेषी को दो माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
पुलिस के अनुसार, 28 अप्रैल 2017 को चुनार थाना क्षेत्र के सहसपुरा निवासी प्रेम शंकर पाण्डेय ने भगवती प्रसाद के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। आरोप था कि गांव के एक निःसंतान दंपति की संपत्ति हड़पने के उद्देश्य से आरोपी ने धोखाधड़ी कर कूटरचित दस्तावेज तैयार किए और खुद को उनका पुत्र दर्शाया। दंपति के पति बाबतपुर हवाई अड्डे पर एरोड्रम अधिकारी के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। आरोपी ने इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर अधिशासी अभियंता, लिफ्ट सिंचाई निर्माण खंड वाराणसी को गुमराह कर हेल्पर के पद पर नौकरी हासिल कर ली थी।
मामले में पुलिस ने प्रभावी पैरवी करते हुए गवाहों को न्यायालय में पेश कराया। प्रथम अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट पल्लवी सिंह ने आरोपी भगवती प्रसाद पुत्र देवनन्दन निवासी शाहपुर, थाना बड़ागांव, वाराणसी को दोषसिद्ध पाते हुए सजा सुनाई। अभियोजन अधिकारी जितेंद्र यादव, विवेचक उपनिरीक्षक अशोक कुमार यादव, कोर्ट मुहर्रिर सोहराब अली, पंकज गौड़ और पैरोकार साहेब सिंह यादव ने पैरवी की।
हिन्दुस्थान समाचार / गिरजा शंकर मिश्रा