कैकेयी के वरदान से अवध में शोक, राम वनगमन पर छलकीं दर्शकों की आंखें

 


- राघवेंद्र रामलीला के दसवें दिन राम-केवट मिलन और गंगा पार उतरने की लीला का मंचन

मीरजापुर, 14 अक्टूबर (हि.स.)। कैकेयी के दो वरदान, श्रीराम का वनवास और दशरथ से विदाई के मार्मिक प्रसंगों ने मंगलवार रात रामलीला में दर्शकों को भावुक कर दिया। श्री राघवेंद्र रामलीला नाट्य समिति की ओर से नगर में आयोजित 21 दिवसीय रामलीला के दसवें दिन कोप भवन से लेकर चित्रकूट निवास तक की लीलाओं का सजीव मंचन किया गया।

लीला में महारानी कैकेयी ने राजा दशरथ से भरत के लिए राजगद्दी और श्रीराम के लिए 14 वर्ष का वनवास मांगा। वचनबद्ध राजा दशरथ विवश हो गए। पिता की आज्ञा का पालन करते हुए भगवान श्रीराम माता सीता और भाई लक्ष्मण के साथ वन के लिए निकल पड़े। इस दृश्य ने दर्शकों की आंखें नम कर दीं।

वन मार्ग में निषादराज से मिलन, मंत्री सुमंत की भावुक विदाई और केवट के सहयोग से गंगा पार उतरने के प्रसंगों का प्रभावशाली मंचन हुआ। इसके बाद भगवान श्रीराम के चित्रकूट में निवास करने की लीला प्रस्तुत की गई। कलाकारों के सजीव अभिनय और संवादों ने रामकथा के प्रसंगों को जीवंत कर दिया।

रामलीला देखने के लिए बड़ी संख्या में नगरवासी जुटे। आयोजन में व्यास कैलाशपति त्रिपाठी, निर्देशक अविनाश अग्रवाल, संरक्षक बचाऊ लाल सेठ, अध्यक्ष लक्ष्मीकांत पांडेय, उपाध्यक्ष अमित गुप्ता, महामंत्री संजय साहू, गोबिंद जायसवाल, रामआसरे दास, सौरभ पुजारी, पवन जायसवाल, राजकुमार गुप्ता सहित समिति के पदाधिकारी और सदस्य मौजूद रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / गिरजा शंकर मिश्रा