भदैनी के ऐतिहासिक गौरा माई तालाब को अवैध कब्जे से मिली मुक्ति, अभिलेखों में भी ताल बहाल

 


—उपजिलाधिकारी (सदर) की कोर्ट से हुआ खारिज अवैध खातादारों का नाम, नगर निगम की पहुंची टीम, मुआयना कर लगाया सरकारी संपत्ति का बोर्ड

वाराणसी, 29 सितंबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के वाराणसी भदैनी क्षेत्र स्थित ऐतिहासिक गौरा माई तालाब को अवैध कब्जों और फर्जीवाड़े से मुक्त कराकर नगर निगम ने अपने पूर्ण नियंत्रण में ले लिया है। मंगलवार को उपजिलाधिकारी (सदर) के न्यायिक आदेश के बाद नगर निगम की टीम ने पूरी योजनाबद्ध तरीके से कार्रवाई करते हुए तालाब की करीब दो एकड़ (2.2 एकड़) भूमि पर अपना बोर्ड स्थापित कर दिया है। इस कार्रवाई के बाद से कूटरचित दस्तावेजों के सहारे सार्वजनिक संपत्तियों पर नजर गड़ाए लोगों में खलबली मची हुई है।

राजस्व अभिलेखों में भदैनी स्थित आराजी नंबर 2317 में 2.2 एकड़ में फैला ऐतिहासिक तालाब 'ताल मशहूर गौरामाई' के नाम से दर्ज था। आरोप था कि कुछ लोगों ने राजस्व अभिलेखों में हेरफेर करके और फर्जी बैनामों के जरिए इस सार्वजनिक जलनिकाय पर अपने नाम दर्ज करवा लिए थे। निगम के राजस्व विभाग की आख्या और पत्राचार पर उपजिलाधिकारी (सदर) की अदालत में वाद दर्ज किया गया। उपजिलाधिकारी (सदर) नितिन सिंह ने मामले की गहन सुनवाई, 1291 फसली के मूल बंदोबस्ती खसरा-खतौनी के साक्ष्यों और उच्चतम न्यायालय (हिंचलाल तिवारी बनाम कमला देवी केस) द्वारा स्थापित विधिक सिद्धांतों का अवलोकन करने के बाद बड़ा फैसला सुनाया। अदालत ने 14 सितंबर 2026 को दिए अपने निर्णय में सभी अवैध खातेदारों व काश्तकारों के नाम तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिए । और 1291 फसली के आधार पर भूमि को पुनः श्रेणी 6(1) जलमग्न भूमि ताल मशहूर गौरामाई (तालाब) के रूप में दर्ज कर अभिलेख दुरुस्त करने का आदेश दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक व सुरक्षित श्रेणी की जलमग्न भूमि पर किसी भी व्यक्ति को भौमिक या मालिकाना अधिकार प्राप्त नहीं हो सकता।

एसडीएम सदर के आदेश के बाद नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल के निर्देश पर संयुक्त नगर आयुक्त व जोनल अधिकारी कृष्ण चंद्र, सहायक नगर आयुक्त अनिल यादव, नायब तहसीलदार शेषनाथ यादव, प्रभारी नगर स्वास्थ्य अधिकारी संदीप भार्गव के नेतृत्व में प्रवर्तन दल और निगम की विशेष टीम भदैनी पहुंची। टीम ने मौके पर नापी की प्रक्रिया पूरी कर सीमांकन किया और 'सरकारी संपत्ति' का बोर्ड स्थापित कर दिया। साथ ही तालाब की सफाई भी शुरू कर दी गई है।

सहायक नगर आयुक्त अनिल यादव ने बताया कि शहर के ताल-पोखरों और सार्वजनिक जमीनों का संरक्षण नगर निगम की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उपजिलाधिकारी सदर के आदेश के अनुपालन में यह कार्रवाई की गई है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसी ने दोबारा इस संपत्ति पर अतिक्रमण या निर्माण की कोशिश की, तो उसके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वाराणसी शहर में अन्य स्थानों पर भी सार्वजनिक तालाबों को अतिक्रमण मुक्त कराने का अभियान लगातार जारी रहेगा।

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी