मौखिक परंपराओं के प्रसार में आभासी माध्यम की भाषाएं एक बड़ी चुनौती: पद्मश्री प्रोफ़ेसर जी एन देवी
गोरखपुर, 10 अप्रैल (हि.स.)। दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, गोरखपुर के अंग्रेज़ी विभाग एवं इंडियन काउंसिल फॉर सोशल साइंस रिसर्च (आईसीएसएसआर) दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में शुक्रवार काे ट्रेडिशन, ट्रांसमिशन एवं ट्रांसफॉर्मेशन: ओरेलिटी एंड इंडीजिनस नॉलिज सिस्टम्स ऑफ़ साउथ एशिया इन अ ग्लोबल वर्ल्ड विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन हुआ।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता प्रख्यात भाषाविद् पद्मश्री प्रोफ़ेसर जी एन देवी ने कहा कि गोरक्षभूमि में आना मेरे लिए सौभाग्य जैसा है। नाथ संप्रदाय का व्यापक प्रसार देश के हर कोने में हुआ। मैं महाराष्ट्र में पैदा हुआ और मराठी में नाथ संप्रदाय के गुरु गहिनीनाथ की गोरखबानी से प्रभावित होकर एक अत्यंत साधारण बालक निरूक्तिनाथ नाथ संप्रदाय और वारकरी परम्परा के प्रतिष्ठित संस्थापक संत के रूप में स्थापित हुए। नाथ संप्रदाय की यह महिमा है जिसने भौगोलिक, सांस्कृतिक, भाषिक इत्यादि सीमाओं को पार करते हुए आम जनमानस की चेतना को प्रभावित किया है। ट्रेडिशन के संप्रेषण एवं रूपांतरण को परिभाषित करते हुए उन्होंने कहा कि परम्परा स्थानीय एवं सुदूर यथार्थ के सम्मिश्रण एवं संचार से समृद्ध होती है।
उन्होंने कहा कि ओरेलिटी का अर्थ केवल ओरल (मौखिक ध्वनि) से नहीं है। भाषा केवल मुख से संबद्ध नहीं है बल्कि यह एक पूरी मानसिक प्रक्रिया है। आर्टिफिशल इंटेलीजेंस की भाषा वस्तुत: ह्यूमन स्पीच के लिए ख़तरा पैदा कर सकती है। एआई की भाषा दरअसल वर्चुअल है जबकि ओरेलिटी रियल ह्यूमन लैंग्वेज से संबंधित है। कार्यक्रम में गेस्ट ऑफ़ हॉनर हिंदी यूनिवर्सिटी, कलकत्ता की कुलपति प्रोफ़ेसर नंदिनी साहू ने फोक कल्चर के क्षेत्र में बढ़ती शोध अध्ययन संभावनाओं एवं विश्वविद्यालयों में वर्तमान में चल रहे व्यापक कार्यक्रमों के विषय पर विस्तार से चर्चा की।
विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफ़ेसर पूनम टंडन ने कार्यक्रम की स्मारिका का विमोचन करते हुए अतिथियों का स्वागत एवं आयोजकों को शुभकामनाएं प्रदान कीं। उन्होंने कहा कि इस तरह की राष्ट्रीय संगोष्ठी के आयोजन से अंग्रेजी विभाग ने एक बड़ी लकीर खींची है भाषा मौखिक परंपरा और स्वदेशी साहित्य से निश्चित रूप से हमें बहुत कुछ सीखने को मिलता है। अगली कड़ी में प्रोफ़ेसर जी एन देवी द्वारा अंग्रेज़ी में लिखी पुस्तक महाभारत: द एपिक एंड द नेशन के हिन्दी अनुवाद महाभारत: महाकाव्य एवं राष्ट्र जिसे अंग्रेज़ी विभाग के पुरातन छात्र हरि प्रताप त्रिपाठी द्वारा अनुदित किया गया है का भी लोकार्पण सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम की समन्वयक विभागाध्यक्ष प्रोफ़ेसर सुनीता मुर्मू, व सह संयोजक प्रोफ़ेसर गौर हरि बेहेरा ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम का संचालन आयोजक सचिव डॉ. आमोद कुमार राय ने किया।
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हिन्दुस्थान समाचार / प्रिंस पाण्डेय