मुफ्त राशन के लिए मोबाइल खरीदना जरूरी नहीं : अपर आयुक्त
— बायोमेट्रिक और आइरिस स्कैन ही मुख्य आधार, नहीं बदला नियम— बुजुर्गों व दिव्यांगों के लिए ओटीपी मात्र वैकल्पिक व्यवस्था, नया फोन लेना अनिवार्य नहीं
लखनऊ, 09 अक्टूबर (हि.स.)। सोशल मीडिया पर मुफ्त राशन प्राप्त करने के लिए नया मोबाइल खरीदने और ओटीपी सत्यापन अनिवार्य किए जाने को लेकर फैलाई जा रही अफवाहों पर उत्तर प्रदेश खाद्य एवं रसद विभाग ने विराम लगा दिया है। विभाग के अपर आयुक्त सत्यदेव की ओर से जारी स्पष्टीकरण में कहा गया है कि मुफ्त राशन प्राप्त करने के लिए किसी भी लाभार्थी को नया मोबाइल खरीदने की कोई आवश्यकता नहीं है। विभाग ने आमजन से ऐसी भ्रामक सूचनाओं पर ध्यान न देने की अपील की है।
बायोमेट्रिक और आइरिस स्कैन ही मुख्य आधार, नहीं बदला नियमखाद्य एवं रसद विभाग के अनुसार, प्रदेश में उचित दर दुकानों पर स्थापित ई-पॉस मशीनों से इलेक्ट्रॉनिक वेइंग स्केल के जरिए तौलकर पहले की तरह ही पारदर्शी तरीके से राशन वितरित किया जा रहा है। यदि किसी लाभार्थी का फिंगरप्रिंट पहली बार में मैच नहीं होता, तो उसे उसी दिन दो अतिरिक्त मौके दिए जाते हैं। इसके बाद भी बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण न होने पर आइरिस (आंखों की पुतली) स्कैन का विकल्प उपलब्ध है। इसके अलावा, राशन कार्ड में दर्ज परिवार का कोई भी अन्य सदस्य सत्यापन कराकर खाद्यान्न प्राप्त कर सकता है।
बुजुर्गों व दिव्यांगों के लिए ओटीपी मात्र वैकल्पिक व्यवस्था, नया फोन लेना अनिवार्य नहीं
विभाग ने स्पष्ट किया है कि ओटीपी आधारित वितरण की सुविधा कोई नई व्यवस्था नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम लागू होने के बाद वर्ष 2017 से ही निरंतर प्रभावी है। यह सुविधा केवल उन अत्यंत वृद्ध, दिव्यांग या गंभीर रूप से बीमार राशन कार्ड धारकों के लिए एक वैकल्पिक उपाय है, जिनका किसी भी तरह से बायोमेट्रिक या आइरिस मिलान संभव नहीं हो पाता। आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में 3.41 करोड़ से अधिक राशनकार्डों में से मात्र 83,093 कार्डों पर ही ओटीपी आधारित वितरण हुआ है, जो कुल लेनदेन का नगण्य हिस्सा है। अतः इसके लिए नया मोबाइल खरीदने की बात पूरी तरह तथ्यहीन और भ्रामक है।
हिन्दुस्थान समाचार / दीपक