उत्तर प्रदेश में बाढ़ का बढ़ रहा दायरा, गंगा-यमुना समेत कई नदियां उफान पर, वाराणसी, प्रयागराज से बिजनौर तक हालात चुनौतीपूर्ण

 








लखनऊ, 22 अगस्त (हि.स.)। पहाड़ों में हो रही लगातार बारिश और स्थानीय मौसम में बदलाव के चलते मानसूनी बरसात का मैदानी इलाकों में असर तेजी से दिखने लगा है। उत्तर प्रदेश में लगातार बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर से कई जिलों में बाढ़ का संकट गहराता जा रहा है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश से लेकर पूर्वांचल तक कई इलाकों में नदियां उफान पर हैं और निचले क्षेत्रों में पानी पहुंचने से काफी लोग प्रभावित हुए हैं। जिला प्रशासन की ओर से संवेदनशील इलाकों में निगरानी और राहत-बचाव की तैयारियां तेज की गई हैं। वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश के बाद लखनऊ से अधिकारियों ने नदियों के उफान और बारिश से बिगड़ते हालातों की लगातार मानीटरिंग की जा रही है।

वाराणसी में गंगा का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। गंगा का पानी चेतावनी बिंदु के करीब पहुंच गया है और वरुणा नदी के किनारे बसे इलाकों में बाढ़ का पानी घरों में घुसने लगा है। अस्सी से नमो घाट तक गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। वहीं वाराणसी के रामनगर स्थित डोमरी क्षेत्र में गंगा नदी में बढ़ते जलस्तर से घाट किनारे के मकानों के नजदीक नदी का पानी पहुंच चुका है। स्थानीय लोगों को अपने सामानों और पशुओं को नदी से दूर रखने की चेतावनी दे दी गई है।

चित्रकूट जनपद में लगातार हो रही बारिश के चलते मंदाकिनी नदी उफान पर है। नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंचने से रामघाट और आसपास के निचले इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं। कई घाट और दुकानें पानी में डूब गई हैं, जबकि सड़कों और बाजार के कुछ हिस्सों में भी बाढ़ का पानी पहुंच गया है। रामघाट क्षेत्र में श्रद्धालुओं और पर्यटकों की आवाजाही प्रभावित हुई है। यहां सड़क तक मंदाकिनी नदी का पानी आ गया है। जिससे यहां नाव से आवाजाही की जा रही है। वहीं कई अन्य स्थानों पर पानी भरने के कारण आवागमन में भी परेशानी हो रही है। जानकारी के अनुसार, नदी के उफान के चलते करीब 25 गांवों का संपर्क प्रभावित हुआ है। हालात को देखते हुए प्रशासन ने निगरानी बढ़ा दी है और लोगों से नदी एवं जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहने की अपील की जा रही है।

इटावा और औरैया जनपद क्षेत्र में यमुना नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से तटवर्ती गांवों में चिंता बढ़ गई है। सिंचाई विभाग के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 21 अगस्त को इटावा में यमुना का जलस्तर 118.76 मीटर और औरैया में 105.02 मीटर दर्ज किया गया। इसी दौरान चंबल नदी का जलस्तर 110.48 मीटर दर्ज हुआ। ऐसे में यमुना-चंबल के किनारे बसे गांवों में प्रशासन की नजर बनी हुई है।

पंचनद संगम पर भी नजरइटावा के चकरनगर क्षेत्र में स्थित पंचनद संगम यमुना, चंबल, सिंध, क्वारी और पहुज नदियों के संगम का क्षेत्र है। नदियों के जलस्तर में वृद्धि होने पर इस इलाके के निचले गांवों में बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है। फिलहाल उपलब्ध ताजा आंकड़ों में पंचनद पर किसी बड़े पैमाने पर गांवों के जलमग्न होने की पुष्टि नहीं मिली है, लेकिन यमुना के लगातार बढ़ते जलस्तर को देखते हुए तटवर्ती क्षेत्रों में सतर्कता है। प्रशासन और राजस्व टीमें स्थिति पर निगरानी बनाए हुए हैं।

प्रयागराज में गंगा-यमुना का उफान लोगों की चिंता बढ़ा रहा है। निचले इलाकों और कई मोहल्लों में पानी पहुंचने लगा है। प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्य शुरू कर दिए हैं और लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के लिए नावों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

बिजनौर में गंगा का दबाव बढ़ा हुआ है। गंगा सदर क्षेत्र के 12 से अधिक गांवों में बाढ़ के पानी से लोग परेशान हैं। वहीं बिजनौर बैराज के तटबंध पर भी गंगा की तेज धारा का दबाव बना हुआ है।

मुरादाबाद में रामगंगा समेत कई नदियां उफान पर हैं। नदी किनारे के इलाकों में बाढ़ का खतरा बना हुआ है और प्रशासन ने लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। कई स्थानों पर कटान की समस्या भी सामने आई है।

कानपुर में भी बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं। पांडु नदी का जलस्तर बढ़ने से बर्रा-8 के वरुण विहार क्षेत्र में कई घर प्रभावित हुए हैं। कुछ परिवार सुरक्षित स्थानों पर चले गए हैं। गंगा के जलस्तर को देखते हुए प्रशासन ने बाढ़ संभावित क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाई है।

बाराबंकी में सरयू नदी के बढ़ते जलस्तर ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। एल्गिन ब्रिज पर शनिवार को नदी का जलस्तर 106.170 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान से 10 सेंटीमीटर ऊपर है। बाढ़ की स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने राहत और बचाव कार्यों को तेज कर दिया है। जिले की तीन तहसीलों के 19 गांव बाढ़ से प्रभावित हैं। जिलाधिकारी ईशान प्रताप सिंह ने सभी संबंधित विभागों को अलर्ट मोड पर रहने और प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी के निर्देश दिए हैं। बाढ़ की सूचनाओं के त्वरित आदान-प्रदान के लिए जिला और तहसील स्तर पर 24 घंटे नियंत्रण कक्ष सक्रिय हैं। जिले में 18 राहत शिविर स्थापित किए गए हैं, जिनमें एक वर्तमान में संचालित है।

इनके अलावा बहराइच, फर्रुखाबाद समेत अन्य जिलों में भी सतर्कता बढ़ाई गई है। प्रदेश में घाघरा और शारदा जैसी नदियों के बढ़ते जलस्तर के कारण कई इलाकों में बाढ़ का खतरा बना हुआ है। 17 अगस्त को जारी रिपोर्ट में बाराबंकी समेत कई जिलों में बाढ़ और भारी बारिश के प्रभाव की स्थिति सामने आई थी।

लखनऊ क्षेत्रीय मौसम विभाग के मौसम वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह ने बताया कि प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान है। ऐसे में नदियों के जलस्तर में और बढ़ोतरी होने की आशंका है। वहीं प्रशासन ने बाढ़ चौकियों, राहत शिविरों और बचाव दलों को सक्रिय रखने पर जोर दिया है। लोगों से नदी और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहने तथा प्रशासन की ओर से जारी गाइडलाइन का पालन करने की अपील की गई है।

हिन्दुस्थान समाचार / मोहित वर्मा