चित्रकूट में बाढ़ प्रभावित आश्रमों को मदद पहुंचाई जाएगी : शंकराचार्य स्वामी अधोक्षजानंद

 


चित्रकूट, 03 सितंबर (हि.स.)। भगवान श्री राम की पावन तपोभूमि चित्रकूट में पिछले आठ दिनों से लगातार हो रही मूसलाधार बारिश और मंदाकिनी नदी के उफान से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। बाढ़ के कारण उत्पन्न हुई विषम परिस्थितियों पर चिंता व्यक्त करते हुए शंकराचार्य स्वामी अधोक्षजानंद देवतीर्थ महाराज ने गहरा दुख जताया है। उन्होंने कहा कि बाढ़ से प्रभावित क्षतिग्रसत कुटिया और आश्रमों को मदद पहुंचाई जाएगी।

चित्रकूट कार्यालय से जारी विज्ञप्ति में बताया गया कि मथुरा के गोवर्धन में अपने चातुर्मास व्रत के दौरान संवाददाताओं से बातचीत करते हुए स्वामी अधोक्षजानंद ने कहा कि चित्रकूट से अत्यंत कष्टदायी समाचार मिल रहे हैं। मां मंदाकिनी के प्रकोप और भीषण बाढ़ के कारण वहां भारी नुकसान हुआ है। आम जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है।

शंकराचार्य जी ने संकट की इस घड़ी में राहत एवं बचाव कार्य में जुटे स्थानीय प्रशासन, सामाजिक संस्थाओं और सेवाभावी लोगों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि चित्रकूट के जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक ने विपरीत परिस्थितियों के बावजूद स्थिति को बहुत ही सराहनीय ढंग से संभाला है। इसके साथ ही उन्होंने सभी अखाड़ों, मठ-मंदिरों और समाजसेवियों से अपील की कि वे पीड़ित लोगों की सहायता के लिए चल रहे सेवा कार्यों को और गति दें।

गोवर्धन में रहकर गोवर्धनधारी भगवान श्री कृष्ण से प्रार्थना करते हुए शंकराचार्य जी ने कहा, मैं भगवान गोवर्धनधारी के क्षेत्र में हूँ और उनसे यही प्रार्थना व निवेदन करता हूँ कि वे वर्षा के देवता इंद्र को नियंत्रित करें ताकि चित्रकूट में बारिश बंद हो सके और लोग पुनः सामान्य जीवन की ओर लौट सकें। स्वामी अधोक्षजानंद ने घोषणा की कि वे वर्तमान में गोवर्धन में चातुर्मास व्रत का पालन कर रहे हैं। चातुर्मास समाप्त होते ही वे स्वयं चित्रकूट धाम का भ्रमण करेंगे और प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लेंगे।

विशेष रूप से चित्रकूट के दूर-दराज़ तथा टाटी घाट जैसे जंगली क्षेत्रों में पयस्विनी नदी के तट पर एकांत साधना कर रहे त्यागी साधु-संतों की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि जो संत संसार के आडंबरों से दूर रहकर विश्व कल्याण के लिए तपस्या करते हैं, उनकी कुटिया और झोपड़ियों के क्षतिग्रस्त होने की खबरें भी मिली हैं। चातुर्मास पूरा होने के बाद उनके मठ और संस्था द्वारा ऐसे सभी साधु-संतों की कुटिया एवं झोपड़ियों का पुनः निर्माण कराया जाएगा तथा मठ की ओर से हर संभव सहायता प्रदान की जाएगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / रतन पटेल