गोष्ठी में याद किये गए आजादी के महानायक चंद्रशेखर आजाद
फर्रुखाबाद, 27 फरवरी (हि.स.) । राष्ट्रीय प्रगतिशील फोरम ने फर्रुखाबाद में अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद के बलिदान दिवस पर कृष्णा प्रेस परिसर सदवाड़ा में गोष्ठी की। इस गोष्ठी में प्रोफेसर रामबाबू मिश्र रत्नेश ने कहा कि न फांसी न जेल। आजाद हैं आजाद ही रहेंगे कहने वाले चंद्रशेखर आजाद अभिमन्यु की तरह अकेले आखिरी दम तक शत्रुओं से लोहा लेते हुए वीरगति को प्राप्त हुए। बलिदानी क्रांतिकारी किताबों में नहीं बल्कि राष्ट्र प्रेमियों के दिल में रहते हैं। वे सत्य ही अमृत पुत्र होते हैं।
गीतकार पवन बाथम ने कहा कि देश को आजादी अहिंसा और प्रदर्शन से नहीं बल्कि युवकों के खून से नहा कर देश आजाद हुआ। क्रांतिकारियों के स्मरण मात्र से आज भी युवकों में बिजली सी दौड़ जाती है। प्रोफेसर कुलदीप आर्य ने कहा कि सनातन वैदिक दर्शन महान उद्देश्य के लिए प्राण उत्सर्ग करने की प्रेरणा देता है। पूर्व प्रधानाचार्य अहिबरन सिंह गौर ने कहा कि इतिहासकारों ने भारतीय क्रांति के इतिहास पर पर्दा डालने का अपराध किया। वर्तमान सरकार ने इस गलती को सुधार करने के प्रयास किए हैं। आचार्य शिवकांत शुक्ला ने कहा कि महाराणा प्रताप गुरु गोविंद सिंह शिवाजी बिरसा मुंडा रानी लक्ष्मीबाई चंद्रशेखर आजाद सरदार भगत सिंह जैसे महावीरों के आदर्श चरित्र पाठ्य क्रर्मों में शामिल करने से राष्ट्रीय चेतना जगेगी। इस अवसर पर डॉ सुनील सिद्धार्थ , वीएस तिवारी, जे पी दुबे और अनुपम मिश्रा ने भी अपने विचार रखे।
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हिन्दुस्थान समाचार / Chandrapal Singh Sengar