हनुमान प्राकट्योत्सव पर उमड़ा आस्था का सैलाब, भव्य श्रृंगार-महाआरती ने मोहा मन
मीरजापुर, 07 नवंबर (हि.स.)। संकटों से मुक्ति की आस, मन में अटूट विश्वास और जुबां पर प्रभु श्रीराम का नाम। शनिवार को हनुमान प्राकट्योत्सव पर पूरा मीरजापुर बजरंगबली की भक्ति में सराबोर नजर आया। संकट मोचन मंदिर में सुबह से ही दर्शन-पूजन के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। घंटा-घड़ियाल, शंखनाद और जय श्रीराम के उद्घोष से मंदिर परिसर गूंज उठा।
बजरंगबली का भव्य श्रृंगार, विधिवत पूजन, महाआरती और भोग के बाद प्रसाद वितरण हुआ। भक्तों ने सिंदूर, चमेली का तेल, लाल पुष्प और बूंदी के लड्डू अर्पित कर सुख-समृद्धि की कामना की।
संकट मोचन मंदिर के महंत पं. योगेंद्र नाथ तिवारी ने कहा कि हनुमानजी की कृपा पाने के लिए प्रभु श्रीराम के प्रति अनन्य भक्ति, हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ विशेष फलदायी माना जाता है। आयोजन में पं. विभव उपाध्याय, पं. अंकित तिवारी, अर्पित तिवारी, अनुभव उपाध्याय, अशोक माली, अमोद माली और गौरव का सहयोग रहा। तहसील चौराहा स्थित लाल महावीर हनुमान मंदिर में भी श्रद्धा के साथ प्राकट्योत्सव मनाया गया।
भक्त की भक्ति पर बजरंगबली ने दे दी अपनी बाईं आंख
संकट मोचन मंदिर से जुड़ी एक अनूठी मान्यता आज भी श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। महंत योगेंद्र नाथ तिवारी के अनुसार, वर्ष 1870 में मंदिर के पुजारी बटुक प्रसाद पाठक को स्वप्न में हनुमानजी ने दर्शन दिए। मान्यता है कि एक भक्त की अनन्य भक्ति से प्रसन्न होकर बजरंगबली ने अपनी बाईं आंख उसे दे दी थी। अगली सुबह प्रतिमा की बाईं आंख गायब मिली। बाद में भक्त के लौटाने पर आंख पुनः प्रतिमा में स्थापित की गई। आज भी वही आंख प्रतिमा में विराजमान है।
हिन्दुस्थान समाचार / गिरजा शंकर मिश्रा