संतों का संदेश: जीते जी परमात्मा की प्राप्ति संभव, नाम-योग साधना पर दिया जोर

 


मीरजापुर, 02 सितंबर (हि.स.)। जिगना क्षेत्र के खैरा गांव स्थित मैदान में बुधवार को जयगुरुदेव पंथ के अनुयायियों का विशाल समागम हुआ। परम संत बाबा जयगुरुदेव के उत्तराधिकारी संत पंकज महाराज ने श्रद्धालुओं को धर्म, प्रेम, दया, करुणा और आपसी एकता का संदेश देते हुए कहा कि परमात्मा की प्राप्ति इसी मनुष्य जीवन में संभव है। इसके लिए सुरत-शब्द योग अर्थात नाम-योग साधना का मार्ग अपनाना चाहिए।

संत पंकज जी महाराज ने कहा कि संत-महात्मा सदैव मानव को धर्म-कर्म के साथ प्रेम और भाईचारे की राह दिखाते हैं। परमात्मा को जीते जी पाया जा सकता है, मृत्यु के बाद किसी को परमात्मा की प्राप्ति नहीं हुई। उन्होंने कहा कि मनुष्य का शरीर स्वयं परमात्मा का बनाया हुआ सच्चा ईश्वरीय मंदिर है। इसलिए मनुष्य को अपने जीवन को सदाचार और आध्यात्मिक साधना से जोड़ना चाहिए।

उन्होंने मांसाहार से दूर रहने का आह्वान करते हुए कहा कि मांसाहार अनेक प्रकार की बीमारियों, परेशानियों और विकृत मानसिकता का कारण बनता है। इसके विपरीत शाकाहार मनुष्य में संयम, धैर्य, प्रेम, दया, करुणा, अहिंसा और सद्विचार को बढ़ावा देता है।

उन्होंने श्रद्धालुओं से नशे और मांसाहार का त्याग कर सात्विक जीवन अपनाने की अपील की। समागम में महिलाओं ने संत पंकज जी महाराज की आरती उतारी। श्रद्धालुओं ने गेंदा और गुलाब की पंखुड़ियों से उनका स्वागत किया। कार्यक्रम में घूरन प्रसाद, मोती लाल सिंह, राजेश कुमार, अवधेश द्विवेदी, बच्चनराम वर्मा, बबलू यादव सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / गिरजा शंकर मिश्रा