उप्र के हमीरपुर में श्रीकृष्ण के भक्तों ने यमुना नदी में स्नान कर खेली दिवाली
-मौन साधकों में तमाम नाबालिग युवकों ने भी किया दिवाली नृत्य
हमीरपुर, 08 नवंबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के हमीरपुर मे दीपावली पर्व को लेकर रविवार को श्रीकृष्ण के भक्तों के सैकड़ों समूहों ने यहां हमीरपुर स्थित यमुना नदी में स्नान कर दिवाली नृत्य किया। मौर पंखों के बंडल यमुना के जल से धोने के बाद मौन साधकों ने एतिहासिक पतालेश्वर मंदिर में भगवान भोले नाथ और हनुमान जी के दर्शन किये। यहां सुबह से ही मौन साधकों का मेला लगा हैं जो दोपहर तीन बजे तक चलेगा। दिवाली नृत्य देखने को स्थानीय लोगों की भीड़ भी उमड़ी। मौन साधकों में तमाम नाबालिग युवक भी मोर पंखे लेकर इस अनुष्ठान में शामिल हुये हैं।
उल्लेखनीय है कि हमीरपुर समेत बुन्देलखण्ड क्षेत्र के शहरी और ग्रामीण इलाकों में मोर पंख लेकर दिवाली नृत्य के साथ विशेष अनुष्ठान श्रीकृष्ण के भक्त (मौन साधक) करते हैं। यह अनुष्ठान धार्मिक और सामाजिक नियमों से बंधकर करना होता हैं। जो भी भक्त मौन साधना करते हैं उन्हें लगातार चौदह सालों तक मांस मदिरा से परहेज करना होता हैं। मान्यता है कि इस नियम को यदि कोई धोखे से तोड़ता है तो उसके अनुष्ठान का फल व्यर्थ चला जाता है। कुंडौरा गांव के भैया लाल ने बताया कि मौन साधना के एक दिन पूर्व अमावस्या (दीपावली) को किसी पवित्र नदी में समूह के साथ स्नान कर दान करना भी जरूरी होता है। लेकिन मोर पंख के बिना साधना करने पर प्रतिबंध भी रहता है।
मौन साधक बाबूलाल यादव ने बताया कि श्रीकृष्ण भक्तों को मौन साधना के दिन नये वस्त्र पहनने होते हैं। साथ ही गायों के लिये एक दिन का आहार भी दान देना पड़ता है। दिन भर मौन रहकर व्रत करना होता है। नंगे पांव जंगलों में भी मौन साधकों को भ्रमण करने का नियम है। तड़के गायों की पूजा करने के बाद शाम को गौ धूल की बेला में जंगलों से वापस लौटकर दोबारा गौ पूजा कर मौन तोडऩे का प्रावधान है। यदि कोई मौन साधक मौन तोड़ देता है तो अन्य मौन साधक मोर पंखों से उसकी पिटाई भी करते हैं। साथ ही गौ मूत्र ग्रहण करने को उसे बाध्य किया जाता है। मौन साधकों ने बताया कि तेरह साल की उम्र से मौन साधना पैतृक गांव में करने के बाद चौदहवें वर्ष मौन साधकों को चित्रकूट या वृन्दावन जाकर अनुष्ठान करना होता हैं।
इतनी कठिन साधना के बाद भी गांव-गांव में मौन साधकों के उत्साह में कोई कमी नहीं आ रही है। जिले के सुमेरपुर क्षेत्र के विदोखर, पारा, जलाला, कुंडौरा, नारायनपुर, इंगोहटा सहित दर्जनों गांवों से मौन साधकों के सैकड़ों समूह ट्रैक्टरों व अन्य साधनों से हमीरपुर आकर यमुना नदी में स्नान किया। स्नान करने के बाद मोर पंख लहराते हुये पतालेश्वर मंदिर पहुंचे जहां पूजा अर्चना करने के बाद मौन साधकों ने दिवाली नृत्य किया। एतिहासिक पतालेश्वर मंदिर में मौन साधकों का मेला भी लगा है। उधर कुरारा, राठ, सरीला, मौदहा व मुस्करा क्षेत्र के सैकड़ों गांवों में भी मौन साधकों ने पवित्र नदियों में स्नान कर दिवाली पर्व का आगाज किया है।
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हिन्दुस्थान समाचार / पंकज मिश्रा