देश भर में उद्यमिता, स्वावलंबन और जनभागीदारी की नई चेतना जगाने का संकल्प लिया जाएगा ; शंशाक
देवरिया, 12 सितंबर (हि.स.) । भगवान विश्वकर्मा की सृजन, श्रम, कौशल और निर्माण की प्रेरणा को उद्यमिता, जनभागीदारी और सांस्कृतिक नवाचार से जोड़ने के उद्देश्य से रविवार को भगवान विश्वकर्मा नवसृजन महोत्सव का आयोजन किया जाएगा।
यह जानकारी सांसद शशांक मणि ने शनिवार को पत्रकार वार्ता में दी। उन्होंने बताया कि जागृति उद्यम केंद्र प्रेक्षा स्थल, बरपार में दोपहर तीन बजे आयोजित होने वाला यह महोत्सव देवरिया लोकसभा क्षेत्र में अमृत प्रयास के द्वितीय संकल्प का शुभारंभ करेगा। सांसद शशांक मणि की पहल पर आयोजित कार्यक्रम के माध्यम से देवरिया-कुशीनगर से देशभर में उद्यमिता, स्वावलंबन और जनभागीदारी की नई चेतना जगाने का संकल्प लिया जाएगा।उन्होंने कहा कि
महोत्सव में भगवान विश्वकर्मा की प्रेरणा से सृजन की तीन धाराओं को आगे बढ़ाने की पहल होगी। पहली धारा आस्था और संस्कृति की होगी। निर्माण के देवता भगवान विश्वकर्मा के मंदिर के भूमिपूजन के साथ आस्था को सृजन की शक्ति से जोड़ने का संदेश दिया जाएगा। वहीं ‘अर्पण’ के माध्यम से सांस्कृतिक नवाचार और भारतीय परंपराओं को नई पीढ़ी से जोड़ने का प्रयास होगा।उन्होंने कहा कि
दूसरी धारा के तहत अमृत प्रयास-संकल्प 2 का शुभारंभ किया जाएगा। इसका उद्देश्य युवाओं और महिलाओं की प्रतिभा, कौशल एवं ऊर्जा को उद्यमिता से जोड़ना है, ताकि वे रोजगार मांगने वाले नहीं बल्कि रोजगार देने वाले बन सकें। इसके लिए स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों और प्रतिभाओं को अवसर देने पर जोर रहेगा। उन्होंने कहा कि तीसरी धारा ‘बरगद क्रांति’ की होगी। इसके तहत बरपार के विशाल वटवृक्ष से नवसृजन की चिंगारी को देवरिया से पूर्वांचल, उत्तर प्रदेश और पूरे देश तक पहुंचाने का संकल्प लिया जाएगा। विचार-मंथन में उद्यमिता के माध्यम से आर्थिक और सामाजिक बदलाव को गांवों तक पहुंचाने पर चर्चा होगी।
उन्होंने कहा कि महोत्सव में स्थानीय उद्यमियों, नवाचार करने वाले युवाओं और सामाजिक क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले लोगों को सम्मानित किया जाएगा। आयोजकों के अनुसार कार्यक्रम का मूल उद्देश्य आस्था को सृजन से, सृजन को उद्यमिता से और उद्यमिता को स्वावलंबन एवं समृद्धि से जोड़ना है।सांसद शशांक मणि ने कहा कि भगवान विश्वकर्मा केवल आस्था के प्रतीक नहीं, बल्कि सृजन, श्रम, कौशल, संस्कृति और निर्माण की भारतीय परंपरा के प्रतीक हैं। प्रयास है कि इस प्रेरणा को युवाओं और गांवों की प्रतिभा से जोड़कर उद्यमिता और रोजगार की शक्ति बनाया जाए। उन्होंने कहा कि ‘सबके प्रयास से विकसित देवरिया लोकसभा’ का संकल्प तभी पूरा होगा, जब गांव की प्रतिभा को अवसर और युवाओं को उद्यमिता का मंच मिलेगा।
उन्होंने कहा कि बरगद क्रांति का विचार इस विश्वास पर आधारित है कि छोटी-सी चिंगारी भी बड़े परिवर्तन का आधार बन सकती है। देवरिया से शुरू होने वाला यह प्रयास गोरक्षप्रांत के 10 जिलों से होते हुए देशभर में उद्यमिता, स्वावलंबन और जनभागीदारी की नई चेतना पैदा करे, यही महोत्सव का व्यापक उद्देश्य है। कार्यक्रम में भगवान विश्वकर्मा मंदिर का भूमिपूजन, ‘अर्पण’ सांस्कृतिक प्रस्तुति, अमृत प्रयास-संकल्प 2 का शुभारंभ, बरगद क्रांति विचार-मंथन तथा स्थानीय उद्यमियों और नवाचारकर्ताओं का सम्मान प्रमुख आकर्षण होंगे।------------
हिन्दुस्थान समाचार / ज्योति पाठक