दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय : 45वें दीक्षांत समारोह में शिक्षा, स्वास्थ्य, नवाचार और सामाजिक सरोकारों का अनूठा संगम
गोरखपुर, 06 अगस्त (हि.स.)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के 45वें दीक्षांत समारोह में केवल उपाधियों का वितरण ही नहीं हुआ, बल्कि शिक्षा, सामाजिक उत्तरदायित्व, स्वास्थ्य जागरूकता, डिजिटल नवाचार और ग्रामीण प्रतिभाओं के सम्मान का भी प्रेरक संदेश दिया गया। गुरुवार काे आयाेजित समारोह की अध्यक्षता कर रही उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने विद्यार्थियों, शिक्षकों तथा ग्रामीण विद्यालयों के मेधावी बच्चों को सम्मानित करते हुए शिक्षा को समाज परिवर्तन का सबसे प्रभावी माध्यम बताया।
गुरुवार काे आयाेजित समाराेह में दीक्षोत्सव के अंतर्गत विश्वविद्यालय द्वारा गोद लिए गए पाँच ग्राम विद्यालयों के विद्यार्थियों के लिए आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को कुलाधिपति ने सम्मानित किया। 'मेरी माँ मेरी प्रेरणा' विषय पर आयोजित भाषण प्रतियोगिता में कक्षा चार की शुभी सिंह ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। 'माँ की दुआओं का असर' विषय पर आयोजित कहानी लेखन प्रतियोगिता में कक्षा पाँच की आराध्या प्रथम रहीं, जबकि 'माँ और मेरा परिवार' विषय पर आयोजित चित्रकला प्रतियोगिता में कक्षा आठ की चाँदनी ने पहला स्थान हासिल किया। कुलाधिपति ने बच्चों की प्रतिभा की सराहना करते हुए कहा कि ग्रामीण अंचलों में भी अपार संभावनाएँ मौजूद हैं, जिन्हें उचित अवसर और मार्गदर्शन देकर नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया जा सकता है।
दीक्षांत समारोह से पूर्व कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने विश्वविद्यालय परिसर में 150 बालिकाओं के एचपीवी (ह्यूमन पैपिलोमा वायरस) टीकाकरण अभियान का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि सर्वाइकल कैंसर जैसी गंभीर बीमारी की रोकथाम के लिए समय पर टीकाकरण और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता अत्यंत आवश्यक है। विश्वविद्यालय द्वारा सहयोगी संस्थाओं के साथ मिलकर चलाया जा रहा यह अभियान सामाजिक उत्तरदायित्व की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जिससे बालिकाओं के बेहतर स्वास्थ्य और सुरक्षित भविष्य का मार्ग प्रशस्त होगा।
समारोह के दौरान कुलाधिपति ने घोषणा की कि शैक्षणिक सत्र 2025-26 के विद्यार्थियों को कुल 74,481 उपाधियाँ प्रदान की जा रही हैं। साथ ही विद्यार्थियों की सुविधा तथा शैक्षणिक अभिलेखों की सुरक्षित एवं स्थायी डिजिटल उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से सभी उपाधियों एवं अंकपत्रों को राष्ट्रीय शैक्षणिक डिपॉजिटरी (डिजिलॉकर) पर उपलब्ध कराने की प्रक्रिया का भी शुभारंभ किया गया। कुलाधिपति ने माउस क्लिक कर इस डिजिटल पहल की शुरुआत करते हुए कहा कि नई शिक्षा व्यवस्था में तकनीक का समुचित उपयोग विद्यार्थियों के लिए पारदर्शी, सुरक्षित और सहज सेवाएँ उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
दीक्षांत समारोह में शिक्षा एवं अकादमिक क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले शिक्षकों को भी सम्मानित किया गया। अधिष्ठाता छात्र कल्याण एवं मनोविज्ञान विभाग की पूर्व अध्यक्ष प्रो. अनुभूति दुबे तथा गृह विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. दिव्या रानी सिंह को उनके उल्लेखनीय शैक्षणिक योगदान के लिए सम्मान प्रदान किया गया। इसके अतिरिक्त संबद्ध महाविद्यालयों के डॉ. अरविंद कुमार यादव, डॉ. विवेक कुमार तथा प्राचार्य प्रो. शैल पांडे को भी शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित किया गया।
समारोह का एक अन्य प्रमुख आकर्षण विश्वविद्यालय के शिक्षकों द्वारा लिखित विभिन्न पुस्तकों तथा 45वें दीक्षांत समारोह की स्मारिका का लोकार्पण रहा। इस अवसर पर दीक्षोत्सव सप्ताह के दौरान आयोजित विविध शैक्षणिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक गतिविधियों पर आधारित विशेष वीडियो का भी प्रदर्शन किया गया, जिसने समारोह में उपस्थित विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं अतिथियों को विश्वविद्यालय की उपलब्धियों और जनसरोकारों से जुड़े प्रयासों से अवगत कराया।
समूचा दीक्षांत समारोह शिक्षा, संस्कार, नवाचार, डिजिटल परिवर्तन, महिला स्वास्थ्य जागरूकता और सामाजिक सहभागिता के समन्वय का सशक्त उदाहरण बनकर उभरा। कुलाधिपति ने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपनी शिक्षा, ज्ञान और नैतिक मूल्यों का उपयोग राष्ट्र निर्माण तथा समाज के समग्र विकास के लिए करें।
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हिन्दुस्थान समाचार / प्रिंस पाण्डेय