साइबर हमलों से सरकारी डिजिटल ढांचे की सुरक्षा करेगा यूपी-सीएसओसी : मणींद्र अग्रवाल

 


कानपुर, 30 अक्टूबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के सरकारी डिजिटल ढांचे को साइबर हमलों से सुरक्षित रखने के लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर का साइबर सुरक्षा प्रौद्योगिकी नवाचार केंद्र (सी थ्री आईहब) प्रदेश में साइबर सिक्योरिटी ऑपरेशंस सेंटर की स्थापना और संचालन करेगा। 104.28 करोड़ रुपये की इस परियोजना को उत्तर प्रदेश मंत्रिमंडल ने मंजूरी दी है। शुरुआती तीन वर्षों तक केंद्र के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी भी सी थ्री आईहब संभालेगा। यह जानकारी शुक्रवार को आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रो. मणींद्र अग्रवाल ने कहीं।

प्रो. मणींद्र अग्रवाल ने कहा कि उत्तर प्रदेश साइबर सिक्योरिटी ऑपरेशंस सेंटर की स्थापना राज्य के डिजिटल ढांचे को लगातार बदलते साइबर खतरों से सुरक्षित रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। साइबर सुरक्षा में किसी भी तरह की चूक से आवश्यक सेवाएं बाधित हो सकती हैं और संवेदनशील डेटा की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। आईआईटी कानपुर का सी थ्री आईहब अपनी विशेषज्ञता और तकनीकी दक्षता के साथ इस पहल का नेतृत्व करने में सक्षम है।

उन्होंने बताया कि सी थ्री आईहब इससे पहले सेल के भिलाई इस्पात संयंत्र, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और भारतीय पत्तन संघ जैसे प्रमुख संगठनों के लिए सिक्योरिटी ऑपरेशंस सेंटर स्थापित कर चुका है। इस अनुभव का लाभ प्रदेश की साइबर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में मिलेगा।

प्रस्तावित उत्तर प्रदेश साइबर सिक्योरिटी ऑपरेशंस सेंटर (यूपी-सीएसओसी) के जरिए सरकारी विभागों के डिजिटल नेटवर्क, एप्लिकेशन, डेटा और महत्वपूर्ण सूचना प्रणालियों की चौबीसों घंटे निगरानी की जाएगी। इसका उद्देश्य साइबर खतरों की समय रहते पहचान करना और किसी भी सुरक्षा संबंधी घटना पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करना है। सरकारी विभागों की आपस में जुड़ी डिजिटल प्रणालियों पर बढ़ती निर्भरता को देखते हुए यह केंद्र संदिग्ध गतिविधियों की पहचान और संभावित खतरों के आकलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

केंद्र में सूचना प्रौद्योगिकी और ऑपरेशनल टेक्नोलॉजी से जुड़ी प्रणालियों की निगरानी के साथ उनकी सुरक्षा कमजोरियों का आकलन किया जाएगा। साइबर हमलों और सुरक्षा संबंधी घटनाओं को उनकी गंभीरता के आधार पर प्राथमिकता देकर संबंधित विभागों के साथ समन्वय से कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मशीन लर्निंग और अन्य आधुनिक साइबर सुरक्षा तकनीकों का उपयोग किया जाएगा।

इस पहल के तहत सरकारी विभागों के मुख्य सूचना सुरक्षा अधिकारियों और नोडल अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित करने के अलावा साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण, साइबर ड्रिल और स्वतंत्र सुरक्षा ऑडिट भी कराए जाएंगे। इससे साइबर खतरों से निपटने की तैयारी बेहतर होगी और सरकारी डिजिटल सेवाओं को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी।

हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप