गोबर से ‘सोना’ बना रहीं महिलाएं, गौशालाओं में तैयार हो रही वर्मी कंपोस्ट

 


- मीरजापुर में स्वयं सहायता समूहों को मिला रोजगार, जैविक खेती को भी बढ़ावा

मीरजापुर, 22 मई (हि.स.)। जिले की गौशालाएं अब केवल निराश्रित गोवंश के संरक्षण का केंद्र नहीं रहीं, बल्कि महिलाओं की आर्थिक मजबूती का जरिया भी बनती जा रही हैं। योगी सरकार की पहल पर जिले के 49 गोवंश आश्रय स्थलों में संरक्षित गोवंश से निकलने वाले गोबर का उपयोग कर स्वयं सहायता समूह की महिलाएं वर्मी कंपोस्ट तैयार कर रही हैं। इससे एक ओर जैविक खेती को बढ़ावा मिल रहा है, वहीं ग्रामीण महिलाओं को रोजगार और आमदनी का नया माध्यम भी मिल रहा है।

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के उपायुक्त (स्वत: रोजगार) रमाशंकर सिंह ने बताया कि जिले के 12 विकासखंडों में एक-एक गौशाला का चयन कर वर्मी कंपोस्ट यूनिट स्थापित की गई है। यहां समूह से जुड़ी महिलाएं गोबर को गड्ढों में एकत्र कर नियमित पानी का छिड़काव करती हैं और उसमें केंचुए डालकर प्राकृतिक खाद तैयार करती हैं। वर्मी कंपोस्ट तैयार होने में लगभग 45 से 60 दिन का समय लगता है। मार्च माह से शुरू हुई यूनिटों में अब तक 5751 किलो वर्मी कंपोस्ट तैयार की जा चुकी है।

महिलाओं द्वारा तैयार वर्मी कंपोस्ट को किसान सीधे खरीद सकते हैं। इसके अलावा वन विभाग, उद्यान विभाग और एफपीओ को भी 10 रुपये प्रति किलो की दर से बिक्री की जा रही है। वर्मी कंपोस्ट बेचकर अब तक महिलाओं को 35 हजार 888 रुपये की आमदनी हो चुकी है।

विजयपुर यूनिट ने बनाई सबसे ज्यादा खाद

छानबे विकासखंड के विजयपुर स्थित वर्मी कंपोस्ट यूनिट में अब तक सबसे अधिक 3100 किलो खाद तैयार की गई है। अधिकारियों के अनुसार वर्मी कंपोस्ट मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के साथ जैविक खेती के लिए बेहद उपयोगी साबित हो रही है।

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हिन्दुस्थान समाचार / गिरजा शंकर मिश्रा