संघ के स्वयंसेवक किससे संवाद करेंगे, यह निर्णय कांग्रेस नहीं करेगी : डॉ. पवन कुमार जैन

 


मुरादाबाद, 15 जनवरी (हि.स.)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के स्वयंसेवक किससे संवाद करेंगे, यह निर्णय कांग्रेस नहीं करेगी। यह बातें आरएसएस के मुरादाबाद विभाग के विभाग प्रचार प्रमुख डॉ पवन कुमार जैन गुरुवार को पत्रकाराें से बात करते हुए कही।

डॉ पवन कुमार जैन ने आगे कहा कि चीन की कम्युनिस्ट पार्टी से जुड़े लोगों से संघ के कार्यकर्ताओं के मिलने पर कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा द्वारा उठाया गया शोर दरअसल संवाद से अधिक इतिहास के डर को उजागर करता है। यह प्रश्न करना कि आरएसएस किससे मिले और किससे नहीं, कांग्रेस की उसी मानसिकता का विस्तार है जिसमें वह स्वयं को देशभक्ति का एकमात्र ठेकेदार मानती रही है। सबसे पहले यह स्पष्ट होना चाहिए कि आरएसएस के कार्यकर्ता किससे संवाद करेंगे, यह निर्णय पवन खेड़ा या कांग्रेस पार्टी नहीं करेगी।

विभाग प्रचार प्रमुख ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एक वैधानिक, पारदर्शी और सामाजिक-सांस्कृतिक राष्ट्रवादी संगठन है, जो भारत सहित विश्व के 60 से अधिक देशों में समाज सेवा, सांस्कृतिक चेतना और वैचारिक संवाद का कार्य कर रहा है। संवाद किसी विचारधारा की स्वीकृति नहीं, बल्कि आत्मविश्वास का प्रमाण होता है। यदि कांग्रेस को चीन से जुड़े किसी भी संपर्क पर आपत्ति है, तो उसे पहले अपने इतिहास की ओर देखना चाहिए। भारत-चीन युद्ध से ठीक पहले 1961 में संसद में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने अक्साई चीन के संदर्भ में कहा था, वहां घास का एक तिनका भी नहीं उगता। यह वक्तव्य उस सोच को दर्शाता है, जिसने राष्ट्रीय भूभाग को उसके रणनीतिक महत्व से अलग कर देखा।

डा. जैन ने बताया कि इतिहास साक्षी है कि कांग्रेस के शासनकाल में भारत को लगभग 38,000 वर्ग किलोमीटर भूमि से हाथ धोना पड़ा। जिस पार्टी के समय में देश की ज़मीन गई, उसे आज राष्ट्रवाद पर सवाल उठाने का नैतिक अधिकार नहीं है। जहां तक आरएसएस की कार्यप्रणाली को समझने का प्रश्न है, तो पवन खेड़ा को यह समझना होगा कि आरएसएस को दूरबीन से नहीं समझा जा सकता। उसे समझने के लिए टीवी स्टूडियो या बयानबाज़ी नहीं, बल्कि किसी आरएसएस शाखा में जाकर उसे प्रत्यक्ष देखना पड़ता है। जहां खुले मैदान में, खुले मन से राष्ट्र निर्माण का कार्य होता है। संवाद राष्ट्रद्रोह नहीं है। लेकिन ऐतिहासिक भूलों पर पर्दा डालकर राष्ट्रवाद का ढोंग करना निश्चित रूप से राष्ट्र के साथ अन्याय है।

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हिन्दुस्थान समाचार / निमित कुमार जायसवाल