पानी की एक भी बूंद व्यर्थ न जाए, जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाएं : मुख्यमंत्री योगी
-मुख्यमंत्री ने की मॉनसून, पेयजल एवं भूजल संरक्षण की समीक्षा
लखनऊ, 21 जून (हि.स.)। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाने का आह्वान करते हुए कहा है कि मौसम की अनिश्चितता और मानसून की संभावित अनियमितता को देखते हुए प्रत्येक प्रदेशवासी को जल संचयन एवं जल संरक्षण के प्रयासों से जुड़ना होगा। उन्होंने कहा कि पानी की एक भी बूंद व्यर्थ नहीं जानी चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर संचालित ‘कैच द रेन’ अभियान को और अधिक प्रभावी ढंग से संचालित किया जाए तथा वर्षाजल संचयन को व्यापक जनभागीदारी से जोड़ा जाए।
रविवार को मौसम की स्थिति, मानसून की प्रगति, पेयजल आपूर्ति तथा भूजल संरक्षण से संबंधित कार्यों की उच्चस्तरीय समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश के किसी भी क्षेत्र में पेयजल संकट की स्थिति उत्पन्न नहीं होनी चाहिए। जलापूर्ति व्यवस्था निर्बाध एवं सुचारु बनी रहे तथा नागरिकों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। उन्होंने कहा कि संभावित कम वर्षा की परिस्थितियों को देखते हुए सभी विभाग अग्रिम तैयारियां सुनिश्चित करें।
बैठक में मौसम विशेषज्ञों ने बताया कि भारत मौसम विज्ञान विभाग के दीर्घावधि पूर्वानुमान के अनुसार वर्ष 2026 के दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान उत्तर प्रदेश में सामान्य से कम वर्षा होने की संभावना है। पूर्वी एवं पश्चिमी उत्तर प्रदेश दोनों क्षेत्रों में जून से सितंबर तक वर्षा सामान्य से कम रहने के संकेत प्राप्त हुए हैं। जून माह में भी प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से कम वर्षा तथा अधिकतम एवं न्यूनतम तापमान सामान्य से अधिक रहने का अनुमान व्यक्त किया गया है।
मुख्यमंत्री ने सिंचाई, पंचायती राज, भूगर्भ जल विभाग, नमामि गंगे, राजस्व तथा कृषि विभाग को मिलकर एक समेकित कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण के प्रयास केवल विभागीय कार्यक्रमों तक सीमित न रहें, बल्कि उन्हें जनसहभागिता से जोड़ा जाए। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाए कि तालाबों और पोखरों में गांवों का गंदा पानी न जाने पाए। मुख्यमंत्री ने पंचायती राज विभाग को निर्देश दिए कि ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसी व्यवस्था विकसित की जाए जिससे पानी की एक भी बूंद व्यर्थ न जाए। उन्होंने अमृत सरोवरों के संरक्षण, स्वच्छता तथा नियमित रखरखाव पर विशेष ध्यान देने को कहा। मुख्यमंत्री ने वर्षाजल संचयन को मिशन मोड में आगे बढ़ाने पर बल देते हुए कहा कि सरकारी भवनों को जल संरक्षण का आदर्श मॉडल बनाया जाए।
अपर मुख्य सचिव, भूगर्भ जल विभाग ने बताया कि भूजल पुनर्भरण के लिए किए गए प्रयासों का प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। वर्ष 2013 में प्रदेश में अतिदोहित विकासखंडों की संख्या 113 थी, जो वर्ष 2025 में घटकर 44 रह गई है। वर्ष 2017 में अन्य स्रोतों से लगभग 30.59 लाख करोड़ लीटर भूजल पुनर्भरण होता था, जो वर्ष 2025 में बढ़कर 35.79 लाख करोड़ लीटर हो गया है। इसी अवधि में प्रदेश का कुल वार्षिक भूजल पुनर्भरण 69.91 लाख करोड़ लीटर से बढ़कर 73.39 लाख करोड़ लीटर तक पहुंच गया है। यह भी बताया गया कि सतत विकास लक्ष्य-6 के अंतर्गत भूजल दोहन की दर को 70 प्रतिशत के स्तर पर लाने का लक्ष्य उत्तर प्रदेश ने प्राप्त कर लिया है। वर्ष 2022 में यह दर 70.66 प्रतिशत, वर्ष 2023 में 70.76 प्रतिशत, वर्ष 2024 में 70.45 प्रतिशत तथा वर्ष 2025 में 70 प्रतिशत रही। पिछले दस वर्षों के दौरान प्रदेश के 361 विकासखंडों में भूजल स्तर में सुधार दर्ज किया गया है। वर्ष 2021 से 2025 के बीच 29 जनपदों में औसत भूजल स्तर में उल्लेखनीय सुधार परिलक्षित हुआ है। 172 विकासखंडों में प्रतिवर्ष 10 सेंटीमीटर से अधिक तथा 69 विकासखंडों में दस वर्षों के दौरान 20 सेंटीमीटर से अधिक सुधार दर्ज किया गया है।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि आगामी वर्षों की कार्ययोजना को जल संरक्षण, हरित ऊर्जा तथा आधुनिक सिंचाई तकनीकों से जोड़ा जाए। उन्होंने मौसम विभाग से मानसून की साप्ताहिक रिपोर्ट नियमित रूप से उपलब्ध कराने की अपेक्षा भी व्यक्त की। बैठक में कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, नगर विकास मंत्री ए.के. शर्मा तथा पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर भी उपस्थित रहे। मंत्रीगणों ने विभागीय प्रयासों एवं प्रगति से मुख्यमंत्री को अवगत कराया।
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हिन्दुस्थान समाचार / दिलीप शुक्ला