महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय में 15 अप्रैल को विद्यार्थियों और किसानों को सम्मानित करेंगे मुख्यमंत्री

 




गोरखपुर, 14 अप्रैल (हि.स.)। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 15 अप्रैल को महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय गोरखपुर (एमजीयूजी) में ‘विकसित भारत-विकसित उत्तर प्रदेश 2047’ के विजन पर आयोजित कार्यक्रम में विद्यार्थियों और किसानों को सम्मानित करेंगे। मुख्यमंत्री योगी की अध्यक्षता में होने वाले इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन और विशिष्ट अतिथि के रूप में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) के एमडी एवं सीईओ के. कृतवासन उपस्थित रहेंगे।

विश्वविद्यालय के ऑडोटोरियम में आयोजित हाेने वाले इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के समक्ष एमजीयूजी और सेंटर ऑफ मेडिकल इनोवेशन गवर्नमेंट इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज ग्रेटर नोएडा के साथ एक एमओयू का भी आदान प्रदान होगा। इस अवसर पर एआई अवेयरनेस फॉर आल कार्यक्रम में योगदान देने वाले 13 विद्यार्थियों और हैकाथॉन के विजेताओं को सम्मानित किया जाएगा। साथ ही एआई फॉर फार्मर्स प्रशिक्षण कार्यक्रम से जुड़े 5 किसानों को भी सम्मानित किया जाएगा।

बहुविषयक विश्वविद्यालय के रूप में विकसित हुआ एमजीयूजी

गोरक्षपीठ के ब्रह्मलीन महंतद्वय दिग्विजयनाथ जी महाराज और अवेद्यनाथ महाराज के आदर्शों- सेवा, संस्कार व शिक्षा को समर्पित महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय गोरखपुर (एमजीयूजी) सिर्फ साढ़े चार साल में बहुविषयक विश्वविद्यालय के रूप में विकसित हुआ है। गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इसके कुलाधिपति हैं। इस विश्वविद्यालय की स्थापना अगस्त 2021 में हुई। यह गोरखपुर का पहला निजी विश्वविद्यालय है। इसका लोकार्पण तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने किया था।

कुलसचिव डॉ. प्रदीप कुमार राव के अनुसार एमजीयूजी की स्थापना पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा की पहुंच के विस्तार में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। वर्तमान समय में यह विश्वविद्यालय आठ संकायों मेडिकल साइंसेज, आयुर्वेद, नर्सिंग एवं पैरामेडिकल साइंसेज, हेल्थ एवं लाइफ साइंसेज, फार्मास्यूटिकल साइंसेज़, एग्रीकल्चर, कॉमर्स एवं मैनेजमेंट तथा कंप्यूटर एप्लिकेशन के माध्यम से 43 कार्यक्रम संचालित कर रहा है। एमजीयूजी आधुनिक वैज्ञानिक ज्ञान को भारत की समृद्ध सांस्कृतिक एवं पारंपरिक विरासत के साथ समन्वित करने में भी जुटा है। विश्वविद्यालय में पारंपरिक चिकित्सा केंद्र (सेंटर फॉर ट्रेडिशनल मेडिसिन) स्थापित है, जिसे भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के भारतीय ज्ञान प्रणाली (आइकेएस) पहल के अंतर्गत ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ के रूप में मान्यता प्राप्त है। विश्वविद्यालय स्वास्थ्य सेवा (हेल्थकेयर), मेडिकल टूरिज्म (मेडिकल टूरिज्म), हेल्थ साइंस एजुकेशन तथा अनुसंधान जैसे प्रमुख क्षेत्रों में नवाचार और नव नेतृत्व पर जोर दे रहा है। इसका उद्देश्य आत्मनिर्भर भारत, विकसित भारत- विकसित उत्तर प्रदेश-2047 के दृष्टिकोण को साकार करना है।

एआई के बढ़ते महत्व को भी कार्ययोजना में शामिल किया

एमजीयूजी ने जीवन और पेशेवर कार्यों के सभी क्षेत्रों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआईल के बढ़ते महत्व को स्वीकार कर उसके अनुरूप कार्ययोजना बनाई है। इसके तहत स्नातक, स्नातकोत्तर और शोध कार्यक्रमों में एआई और डेटा साइंस की बुनियादी दक्षताओं को शामिल किया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य एआई साक्षरता को उच्च शिक्षा का अभिन्न अंग बनाना है।

सशक्त अकादमिक स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्र का विकास

एमजीयूजी ने दो प्रमुख अस्पतालों महायोगी गोरखनाथ चिकित्सालय (बालापार रोड) और गुरु श्री गोरक्षनाथ चिकित्सालय (गोरखनाथ) के माध्यम से एक सशक्त अकादमिक स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्र विकसित किया है। ये संस्थान मेडिकल, आयुर्वेद, नर्सिंग और पैरामेडिकल छात्रों को व्यापक क्लिनिकल अनुभव प्रदान करते हैं तथा आसपास के समुदायों को किफायती स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराते हैं। इसके अतिरिक्त, आयुर्वेद अस्पताल और पंचकर्म केंद्र पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों पर इसके विशेष फोकस को और सुदृढ़ करते हैं।

नवाचार और करुणामय सेवा केंद्र बनाना लक्ष्य

कुलपति डॉ. सुरिंदर सिंह का कहना है कि एमजीयूजी स्वयं को ज्ञान, नवाचार और करुणामय सेवा के केंद्र के रूप में स्थापित करने का लक्ष्य रखता है, जो सांस्कृतिक मूल्यों में निहित और तकनीकी उत्कृष्टता से प्रेरित है। यह एक ऐसे समग्र शिक्षा केंद्र के रूप में विकसित होने की आकांक्षा रखता है, जहां परंपरा और आधुनिकता का संगम होता है, और ज्ञान समाज सेवा में परिवर्तित होता है।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रिंस पाण्डेय