वाराणसी के केन्द्रीय कारागार में दस दिवसीय रामलीला मुकुट पूजन और नारद मोह से शुरू
—बंदी ही रामायण में वर्णित विभिन्न पात्रों की भूमिका निभा रहे
वाराणसी, 11 अक्टूबर (हि.स.)। शारदीय नवरात्र के पहले दिन रविवार को शिवपुर स्थित केंद्रीय कारागार (सेन्ट्रल जेल) परिसर में रामलीला की शुरूआत मुकुट पूजन से हुई। दस दिवसीय रामलीला में कारागार के बंदी ही रामायण में वर्णित विभिन्न पात्रों की भूमिका निभाएंगे। यह जानकारी कारागार के जेलर अखिलेश कुमार ने दी।
उन्होंने बताया कि रामलीला में पहले दिन बंदियों ने नारद मोह लीला का मंचन किया गया। इसमें कामदेव द्वारा नारद की समाधि भंग करने के असफल प्रयास से लेकर भगवान विष्णु की माया और भगवान राम के प्राकट्य तक की कथा प्रस्तुत की गई। रामलीला में दिखाया गया कि नारद की समाधि भंग करने में असफल रहने पर कामदेव उनके चरणों में गिरकर क्षमा मांगते हैं। इससे नारद को अपनी काम पर विजय का अहंकार हो जाता है। वह यह प्रसंग भगवान शिव को सुनाते हैं। शिव उनकी बात सुन कर कहते है कि जो समाचार आपने हमें बताई यह बात भगवान विष्णु से कदापि न कहिएगा, लेकिन नारद अभिमानवश विष्णु को भी यह समाचार सुना देते हैं।
नारद का अहंकार दूर करने के लिए भगवान विष्णु माया रचते हैं। इसके प्रभाव में नारद राजा शीलनिधि की कन्या पर मोहित हो जाते हैं और विष्णु से अपने लिए उनके जैसा रूप मांगते हैं। विष्णु उन्हें वानर का रूप दे देते हैं, जिससे उनकी खूब हंसी उड़ती है। क्रोधित नारद विष्णु को मनुष्य रूप में नारी विरह में भटकने और वानरों द्वारा सहायता मिलने का श्राप देते हैं।
इसके बाद लीला में भगवान राम अपने अंशों सहित अयोध्या में महाराज दशरथ के यहां प्रकट होते हैं। इसी प्रसंग के साथ पहले दिन की लीला समाप्त हुई। इस अवसर पर जेल के वरिष्ठ चिकित्साधिकारी लक्ष्मीकांत त्रिपाठी, चिकित्साधिकारी अभिषेक सिंह, जेलर अखिलेश कुमार, डिप्टी जेलर अखिलेश कुमार मिश्र, अमित कुमार वर्मा सहित अफसर अफसर व बंदी रक्षक भी माजूद रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी