योगी कैबिनेट ने औद्योगिक इकाइयों के प्रोत्साहन पैकेज पर लगाई मुहर

 


-उच्च स्तरीय प्राधिकृत समिति की संस्तुतियों के आधार पर एलओसी, सब्सिडी और संशोधन प्रस्ताव स्वीकृत

लखनऊ, 07 अप्रैल (हि. स.)। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश औद्योगिक निवेश एवं रोजगार प्रोत्साहन नीति-2022 के अंतर्गत उच्च स्तरीय प्राधिकृत समिति (एचएलईसी) की संस्तुतियों को मंजूरी दे दी गई। इस निर्णय के तहत राज्य में संचालित विभिन्न औद्योगिक इकाइयों को लेटर ऑफ कंफर्ट जारी करने, पूंजीगत सब्सिडी उपलब्ध कराने तथा परियोजनाओं में आवश्यक संशोधन को स्वीकृति दी गई है, जिससे उद्योगों को संचालन में सहूलियत मिलेगी और उनकी वित्तीय व्यवहार्यता मजबूत होगी।

कैबिनेट बैठक के बाद अपर मुख्य सचिव अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आलोक कुमार ने निर्णयाें की जानकरी दी। उन्हाेंने

बताया कि कैबिनेट के समक्ष रखे गए प्रस्तावों में छह नई औद्योगिक इकाइयों की स्थापना, एक इकाई के सब्सिडी क्लेम और एक परियोजना में संशोधित एलओसी को मंजूरी दी गई। उन्होंने बताया कि शाहजहांपुर में ओएफसी टेक प्रा लि (589 करोड़ रुपये) एवं हाथरस में एजेआई केन इंडस्ट्रीज (1128 करोड़ रुपये) को एसजीएसटी प्रतिपूर्ति के लिए एलओसी जारी किए जाने की मंजूरी दी गई है।

अपर सचिव आलाेक कुमार ने बताया कि गोरखपुर स्थित इंडिया ग्लाइकोल्स लि. (669 करोड़ रुपये) और प्रयागराज की विस्कोस इंटरनेशनल प्रा. लि. (269 करोड़ रुपये) तथा गौतमबुद्ध नगर की इंटीग्रेटेड बैटरीज इंडिया प्रा. लि. (1146 करोड़ रुपये) को पूंजीगत सब्सिडी देने का निर्णय लिया गया है, जिससे इन इकाइयों की लागत में कमी आएगी और उत्पादन क्षमता को बढ़ाने में सहायता मिलेगी। इसके अतिरिक्त मुरादाबाद में त्रिवेणी इंजीनियरिंग को पूंजीगत सब्सिडी वितरण की स्वीकृति दी गई है। साथ ही गौतमबुद्ध नगर स्थित आवादा इलेक्ट्रो लि. के 16,000 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट में संशोधन प्रस्ताव को भी कैबिनेट ने अनुमोदित किया है, जिससे परियोजना के क्रियान्वयन में आने वाली व्यावहारिक बाधाओं को दूर किया जा सकेगा।

उन्हाेंने बताया कि बैठक में विशेष रूप से सोलर सेल और मॉड्यूल मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े बड़े निवेश प्रस्तावों को मंजूरी दी गई, जिससे यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण क्षेत्र और ग्रेटर नोएडा क्षेत्र को ग्रीन एनर्जी हब के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति होगी। इन परियोजनाओं से सोलर उपकरणों के आयात पर निर्भरता घटेगी और प्रदेश में रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।

गोरखपुर में बनेगा वानिकी एवं औद्यानिकी विश्वविद्यालय

अपर सचिव कुमार ने बताया कि कैबिनेट बैठक में गोरखपुर में उत्तर प्रदेश वानिकी एवं औद्यानिकी विश्वविद्यालय की स्थापना को मंजूरी दे दी गई। इसके लिए “उत्तर प्रदेश वानिकी एवं औद्यानिकी विश्वविद्यालय अध्यादेश-2026” के प्रख्यापन को स्वीकृति प्रदान की गई है। यह विश्वविद्यालय गोरखपुर के कैम्पियरगंज क्षेत्र में लगभग 50 हेक्टेयर भूमि पर स्थापित किया जाएगा। प्रस्तावित विश्वविद्यालय में वानिकी, औद्यानिकी, वन्य जीव संरक्षण, जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, एग्रोफॉरेस्ट्री, फल एवं बागवानी सहित कई आधुनिक विषयों में बीएससी, एमएससी, पीएचडी और डिप्लोमा पाठ्यक्रम संचालित किए जाएंगे। इसका उद्देश्य वनावरण बढ़ाना, जैव विविधता संरक्षण को मजबूत करना, किसानों और छात्रों को आधुनिक प्रशिक्षण देना तथा कृषि और पर्यावरण के क्षेत्र में शोध को बढ़ावा देना है। इस फैसले से प्रदेश में हरित विकास, खाद्य सुरक्षा और पर्यावरण संतुलन को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

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हिन्दुस्थान समाचार / दिलीप शुक्ला