वाराणसी : बरेका में विजयादशमी की तैयारी पूरी, विशालकाय रावण के पुतले का होगा दहन

 




-रामचरितमानस पर आधारित चार घंटे का नाट्य रूपक होगा आकर्षण का केंद्र

-तीन पीढ़ियों से पुतले बना रहा शमशाद खान का परिवार

वाराणसी, 19 अक्टूबर (हि.स.)। धर्मनगरी वाराणसी में शारदीय नवरात्र की नवमी तिथि पर सोमवार को कन्या पूजन के साथ विजयादशमी पर्व की तैयारियां भी जोर-शोर से चलती रहीं। शहर के विभिन्न इलाकों में रामलीला समितियां रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों को अंतिम रूप देने में जुटी रहीं। इसी क्रम में बनारस रेल इंजन कारखाना (बरेका) परिसर में भी दशहरा आयोजन की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।

बरेका के खेल मैदान में क्रेन की मदद से 75 फीट ऊंचे रावण, 65 फीट ऊंचे कुंभकर्ण और 60 फीट ऊंचे मेघनाद के पुतले खड़े कर दिए गए हैं। विशालकाय पुतलों के तैयार होते ही आयोजन स्थल पर दशहरे का उत्सवी माहौल नजर आने लगा है। इस बार दस सिरों वाले पारंपरिक रावण के बजाय एक सिर वाले लंकेश का पुतला आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहेगा।

इन विशालकाय पुतलों के निर्माण की जिम्मेदारी तीन पीढ़ियों से शमशाद खान का परिवार निभाता आ रहा है। पुतलों को तैयार करने में परिवार के सभी सदस्य जुटते हैं। आयोजन को लेकर बरेका प्रशासन की ओर से सुरक्षा व्यवस्था पर भी विशेष सतर्कता बरती जा रही है।

पांच दृश्यावलियों में होगा रामकथा का मंचन

बरेका में रावण दहन से पहले रामचरितमानस पर आधारित लगभग चार घंटे के नाट्य रूपक का मंचन किया जाएगा। इसमें राम वनगमन से लेकर रावण वध तक की कथा को पांच दृश्यावलियों के माध्यम से प्रस्तुत किया जाएगा। रूपक निदेशक एसडी सिंह के निर्देशन में कलाकार संवादों और दृश्यों का अभ्यास कर रहे हैं।

नाट्य रूपक की प्रस्तुति के बाद रात करीब साढ़े सात बजे रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के विशालकाय पुतलों का दहन किया जाएगा। इस आयोजन को देखने के लिए बरेका परिसर में बड़ी संख्या में लोगों के जुटने की संभावना है।

रामनगर और मलदहिया में भी होगा रावण दहन

वाराणसी में दशहरे पर बरेका के अलावा रामनगर और मलदहिया में भी रावण दहन प्रमुख आकर्षण रहेगा। इस बार बरेका में 75 फीट, रामनगर की रामलीला में 65 फीट और मलदहिया में 40 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन किया जाएगा।

मलदहिया में रावण दहन के दौरान विशेष आतिशबाजी भी आकर्षण का केंद्र रहेगी। इसके लिए बिहार के नालंदा से आतिशबाजी मंगाई गई है। तीनों स्थानों पर होने वाले आयोजनों को देखने के लिए हर साल बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं।

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी