दोबारा लिखे गैंगस्टर मामले में पूर्व एमएलसी कमलेश पाठक को नहीं मिली जमानत
औरैया, 18 जून (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के औरैया जनपद में शहर के दोहरे हत्याकांड में लगभग छह साल से अधिक समय से केंद्रीय कारागार आगरा में निरुद्ध चल रहे पूर्व एमएलसी कमलेश पाठक के विरुद्ध दोबारा लिखे गैंगस्टर मामले में सत्र न्यायालय ने जमानत याचिका गुरुवार को खारिज कर दी। विशेष न्यायाधीश गैंगस्टर एक्ट के प्रभारी जज महेश कुमार ने उनकी जमानत याचिका की सुनवाई की और उसे निरस्त कर दिया।
बहुचर्चित दोहरे हत्याकांड में जेल में बंद पूर्व एमएलसी कमलेश पाठक की रिहाई में तमाम बाधाएं आड़े आ रही हैं। 20 मार्च 2020 को शहर के मोहल्ला नरायनपुर स्थित पंचमुखी हनुमान मंदिर में अधिवक्ता मंजुल चौबे व उसकी चचेरी बहन सुधा की मौत पर कमलेश पाठक व उनके 11 साथियों के विरुद्ध पुलिस ने हत्या का आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया था। 16 मार्च 2020 से वह लगातार केंद्रीय कारागार आगरा में निरुद्ध चल रहे हैं। इस घटना पर उनके विरुद्ध गैंगस्टर एक्ट लगाया गया। जिसका निर्णय सत्र न्यायालय ने 24 मार्च 2026 को छह वर्ष की सजा सुनाई थी। इस सजा के विरुद्ध पुनः उन्हें उच्च न्यायालय से राहत मिली। जब तक उनकी रिहाई संभव होती, प्रशासन ने चार अप्रैल 2026 को कमलेश पाठक व उनके एक सहयोगी अब्दुल सत्तार के विरुद्ध पुनः गैंगस्टर का मामला सदर कोतवाली में पंजीकृत कराया।
इस मामले में उन पर जेल में रंगदारी वसूलने को आधार बनाया गया। रील बटन के थोक व्यापारी राजेश कुमार ने कमलेश पाठक पर 50 हजार रुपये रंगदारी सहयोगी अब्दुल सत्तार के माध्यम से वसूलने का आरोप लगाया गया। कमलेश पाठक की ओर से दोबारा लिखाए गए गैंगर के मामले में जमानत प्रार्थना पत्र सत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।
बचाव पक्ष के वकील ने बहस करते हुए कहा कि वह पूर्णतया निर्दोष हैं तथा उसे राजनीतिक दुर्भावना विद्वेष एवं विधि की प्रक्रिया के दुरुपयोग धरा मिथ्या रूप से फंसाया गया है। 16 मार्च 2020 से वह निरंतर केंद्रीय कारागार आगरा में निरुद्ध हैं तथा तब से आज तक एक दिन के लिए भी जेल से बाहर नहीं आए हैं। कमलेश पाठक द्वारा जेल के भीतर से रंगदारी वसूलने की कहानी पूर्णतयः काल्पनिक और असंभव प्रतीत होती है।
वहीं अभियोजन पक्ष ने यह कहकर विरोध जताया कि कमलेश पाठक पर 36 मुकदमों का आपराधिक इतिहास है। अगर जमानत दे दी गई तो वह पुनः अपराध कारित कर सकते हैं। दोनों पक्षों को सुनने के बाद अपर सत्र न्यायाधीश महेश कुमार ने कमलेश पाठक का जमानत प्रार्थना पत्र निरस्त कर दिया।
अधिवक्ता अंकुर अवस्थी ने बताया कि अब बचाव पक्ष को इस आदेश के विरुद्ध हाईकोर्ट जाना पड़ेगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुनील कुमार