अदभुत क्रांतिकारी और फक्कड़ समाजसेवी धर्मेश दुबे का भावपूर्ण स्मरण किया
औरैया, 03 जून (हि.स.)। खाली जेब, बिना किसी आमदनी के जरिए और बिना चंदा खोरी की आदत के बावजूद नगर में लोकप्रिय होकर उत्तर प्रदेश के औरैया जिले की सीमाएं लांघते हुए प्रसिद्धि के उच्चतम शिखर को स्पर्श करने वाले पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष धर्मेश दुबे की चौथी पुण्य तिथि पर बुधवार को नगर के प्रबुद्ध नागरिकों ने उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान उनके त्यागमई व्यक्तित्व और निष्काम भावना वाले संघर्ष पूर्ण व्यक्तित्व के विविध पहलुओं पर विचार व्यक्त किए और उनके जीवन मूल्यों को अनुकरणीय बताते हुए उनका भरपूर यशोगान किया।
स्मरणांजलि समारोह की अध्यक्षता शहीद स्मारक समिति के अध्यक्ष पूर्व सभासद बृज किशोर पांडेय ने की और भावपूर्ण संचालन नेताजी सुभाष मंच के संयोजक प्रवीण गुप्ता ने किया।
इटावा से आए मुख्यवक्ता स्तंभकार गणेश ज्ञानार्थी ने कहा कि स्वर्गीय धर्मेश दुबे सार्वजनिक जीवन में उत्कृष्ट जीवन मूल्यों सदाचरण तथा भ्रष्टाचार विरोध के लिए प्रख्यात रहे और अनेक मुख्यमंत्रियों और प्रधानमंत्रियों से निकट संबंधों के बावजूद उनसे कोई सहायता लिए बगैर बिना किसी व्यवसाय और आमदनी के जीवन भर अधिकतम पैदल चलकर लोगों की बुनियादी समस्याओं को सुलझाने में जुटे रहे।
शहीद स्मारक समिति के संस्थापक अध्यक्ष धर्मेश दुबे को औरैया में संघर्ष सत्याग्रह और रचनाधर्मिता के लिए श्रद्धा और सम्मान के लिए स्मरण किया जाएगा। उनके जीवन मूल्यों की नींव पर नए युग की पौध यदि तैयार होगी,तभी पूर्वजों द्वारा बड़ी मुश्किल से प्राप्त की गई आज़ादी की रक्षा संभव है।
अध्यक्षता कर रहे ब्रदर पाण्डे ने उनके जीवन के वे संस्मरण सुनाए कि कैसे उन्होंने ठेकेदार द्वारा कमीशन के पचपन हज़ार रूपये और मिठाई का डिब्बा देने की कोशिश पर उसे सार्वजनिक रूप से लताड़ा और कहा कि इन रूपयों से मेरे जीवन को नष्ट करना चाहते हो और कहा कि शहीद स्मारक समिति के लिए उन्होंने जो आधार शिला रख कर जो भव्यता प्रदान की और इसे सर्वदलीय आयोजन बनाया, उसी अनुरूप नई पीढ़ी को बलिदानियों के संघर्ष और भोगी गई पीड़ा का इतिहास बता कर उनकी स्मृतियों को अक्षुण्य बनाया जाता रहेगा।
स्वर्गीय के अनन्य सहयोगी वरिष्ठ पत्रकार समाजसेवी आनंद कुशवाहा ने उनके साथ बिताए गए जीवन के 45 वर्षों का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत करते हुए कहा कि आज के युग में ऐसे व्यक्तित्व की कल्पना भी असंभव प्रतीत होती है, जो आए हुए धन को ठुकरा दे और फक्कड़ जीवन के बावजूद प्रसिद्धि के उच्चतम शिखर को स्पर्श करता हुआ लोगों के दिल और दिमाग में स्थाई अमिट छाप छोड़े।
संचालन कर रहे प्रवीण गुप्ता ने बहुत से संस्मरण सुनाए और बताया कि नगर पालिकाध्यक्ष रहते हुए वे जब प्रदर्शनी के कवि सम्मेलन के लिए कवियों को निमंत्रित करने के लिए कानपुर लखनऊ आदि गए तो उन सबके पास किराये के भी पर्याप्त पैसे नहीं थे। तब ट्रक वालों से लिफ्ट लेकर काफी यात्रा फ्री में की और निमंत्रित करके लौट आए, जिसके बाद उनकी सरलता ईमानदारी और राष्ट्र प्रेम से प्रभावित बड़े बड़े कवियों ने आकर औरैया में शानदार काव्यपाठ न्यूनतम किराए में आकर किया था।
इस अवसर पर विवेक पोरवाल, अशोक शर्मा, महेंद्र सिंह धाकड़, संतोष शर्मा, आबिद अख्तर, आदि ने विचार व्यक्त किए। पवन कुमार दुबे, प्रदीप दुबे, संजीव पाण्डे, अनिल द्विवेदी, मनोज कुमार गुप्ता, शिव कुमार शुक्ला एडवोकेट, कृष्ण दुबे, आत्माराम बाजपेई, अंजनी कुमार दीक्षित, जसवंत सिंह, संजय कुमार सुंदरीपुर, पोले सावरन, शेखर गुप्ता, उमाशंकर लोधी, राम कृष्ण वर्मा, मुकेश कुमार सविता एडवोकेट, धीरु राजपूत, प्रवीण उपाध्याय, पुल्ली दीक्षित, संजय कुमार, अभिषेक कुमार भंडारीपुर, रमाकांत मिश्रा, अशोक अग्रवाल, संदीप चक आदि ने भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके जीवन की विशेषताओं को समझने के लिए अगली बार और बड़े आयोजन की रूपरेखा बनाने का संकल्प किया। उनके ज्येष्ठ पुत्र ज्ञानेंद्र दुबे ने सभी का आभार व्यक्त किया।स्वर्गीय के अनुज दिनेश दुबे पुत्र सोमेंद्र दुबे एडवोकेट और हेमेन्द्र दुबे ने आगंतुकों का भावपूर्ण स्वागत सत्कार किया।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुनील कुमार