सैकड़ों महिलाओं के लिए प्रेरणा स्राेत बनी रिंकी, शासकीय योजनाओं और स्वयं सहायता समूह से जुड़कर खुद को बनाया आत्मनिर्भर

 


फिरोजाबाद, 17 जुलाई (हि.स.)। जिला प्रशासन के सहयोग और सरकारी योजनाओं से जुड़कर ग्राम लखई की रहने वाली रिंकी की सफलता की कहानी आज क्षेत्र की सैकड़ों महिलाओं के लिए प्रेरणा स्राेत बन चुकी है, कभी घर की चार दिवारी तक सीमि़त रहने वाली रिंकी आज स्वयं सहायता समूह‘‘ से जुड़कर न केवल आत्मनिर्भर बनी है, बल्कि उन्होंने शहद उत्पादन की दिशा में सफलता के नए आयाम स्थापित किए हैं।

यह कहानी जनपद फिरोजाबाद के विकासखंड मदनपुर के अंतर्गत आने वाले ग्राम लखई (ग्राम पंचायत बाछेमई) की रहने वाली रिंकी की है। रिंकी की सफलता की कहानी आज क्षेत्र की सैकड़ों महिलाओं के लिए प्रेरणा का नया स्रोत बन चुकी है, कभी घर की चार दिवारी तक सीमि़त रहने वाली रिंकी आज ‘‘राधा रानी स्वयं सहायता समूह‘‘ से जुड़कर न केवल आत्मनिर्भर बनी है, बल्कि उन्होंने शहद उत्पादन की दिशा में सफलता के नए आयाम स्थापित किए हैं। रिंकी की आर्थिक स्थिति शुरुआत में सामान्य थी और वह घर से बाहर भी निकल नहीं पाती थी, लेकिन उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव तब आया जब वह मदनपुर ब्लॉक में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत गठित ‘‘राधा रानी स्वयं सहायता समूह‘‘ से जुड़ी।

इसके बाद उन्होंने उपायुक्त स्वतः रोजगार तुलिका श्रीवास्तव के मार्गदर्शन में आरसेटी के माध्यम से शहद उत्पादन का विधिवत् और तकनीकी प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद बैंक और समूह के सहयोग से उन्हें एक लाख 20 हजार रुपये का ऋण प्राप्त हुआ, जिससे उन्होंने 50 बॉक्स के साथ शहद उत्पादन के कार्य की शुरुआत की।

पहले ही वर्ष मे रिंकी ने कड़ी मेहनत से लगभग 02 लाख रूपये का मुनाफा कमाया और समय पर ऋण भी चुकता कर दिया, रिंकी के इस जज्बे को देखते हुए मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना (मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास योजना) के अंतर्गत उन्हे व्यवसाय विस्तार के लिए 05 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत हुआ, इस राशि से उन्होंने अपने इस काम को और आगे बढाया, वर्तमान में उनके पास 220 से अधिक शहद उत्पादन के बॉक्स है, जिनसे बड़े पैमाने पर शुद्ध शहद का उत्पादन किया जा रहा है।

आज रिंकी इस व्यवसाय से हर महीने लगभग 1 लाख 20 हजार रुपये की आय अर्जित कर रही है। इस आमदनी से उनके परिवार की आर्थिक स्थिति में अभूतपूर्व सुधार हुआ है, उनकी दो बेटियां और एक बेटा अच्छे विद्यालय में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त कर रहें है।

रिंकी का कहना है कि पहले मैं घर से बाहर नहीं निकल पाती थी लेकिन समूह से जुडने और इस व्यवसाय को शुरू करने के बाद मेरे आत्म विश्वास में भारी वृद्धि हुई है, आज मेरा पूरा परिवार इस कार्य में मेरा सहयोग करता है और समाज में एक नया सम्मान मिला है। राधारानी स्वंय सहायता समूह के माध्यम से रिंकी ने अपने साथ गांव की 5 से 6 महिलाओं को इस रोजगार से जोड़ा है, यह महिलाएं अपनी क्षमता और कार्य के अनुसार इस व्यवसाय से जुड़कर नियमित रूप से अच्छी आमदनी और बचत कर रही है, जिससे वह भी आर्थिक रूप से स्वावलम्बी बन रही हैं।

रिंकी ने अपनी इस सफलता का श्रेय उत्तर प्रदेश सरकार की जन कल्याणकारी योजनाओं और जिला प्रशासन और आजिविका मिशन की टीम को दिया है।

हिन्दुस्थान समाचार / कौशल राठौड़