लोकतंत्र की मजबूती के लिए विधायिका का सशक्त, जागरूक और जिम्मेदार होना आवश्यक : सतीश महाना

 






पटना/लखनऊ, 12 जुलाई (हि.स.)। उत्तर प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष सतीश महाना ने रविवार काे कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए विधायिका का सशक्त, जागरूक और अपनी जिम्मेदारियों के प्रति सजग होना अत्यंत आवश्यक है। भारतीय संविधान ने विधायिका को महत्वपूर्ण शक्तियां प्रदान की हैं। इसलिए एक विधायक की सबसे बड़ी पहचान विधानसभा से ही बनती है। उन्होंने कहा कि सहमति-असहमति, संवाद और सार्थक चर्चा लोकतंत्र की मूल भावना को मजबूत करते हैं।

विधानसभा के अध्यक्षसतीश महाना ने रविवार काे बिहार विधानसभा के नवनिर्वाचित एवं वर्तमान सदस्यों के लिए गया जी स्थित बिहार लोक प्रशासन एवं ग्रामीण विकास संस्थान (बिपार्ड) परिसर में आयोजित दो दिवसीय ‘प्रबोधन कार्यक्रम’ में विधायकों को संसदीय परंपराओं, विधायी प्रक्रियाओं और जनप्रतिनिधियों के दायित्वों के संबंध में मार्गदर्शन दिया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने कहा कि वर्तमान व्यवस्था लोकतांत्रिक व्यवस्था है, राजशाही नहीं। अब शासन व्यवस्था बैलेट की ताकत से संचालित होती है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र के चारों स्तंभों की अपनी-अपनी भूमिका, सीमाएं और जिम्मेदारियां निर्धारित हैं लेकिन विवाद की स्थिति तभी उत्पन्न होती है, जब कोई एक स्तंभ दूसरे के अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप कर टकराने का प्रयास करता है। इसलिए लोकतंत्र की मजबूती के लिए आवश्यक है कि सभी स्तंभ अपनी संवैधानिक मर्यादाओं के अनुरूप कार्य करते हुए अपनी भूमिका का प्रभावी निर्वहन करें।

उन्हाेंने कहा कि जनप्रतिनिधि और जनता के बीच विश्वास का संबंध सबसे महत्वपूर्ण होता है। उत्तर प्रदेश के विधानसभा अध्यक्ष ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि उन्होंने कभी भी जनता से यह वादा नहीं किया कि प्रत्येक कार्य निश्चित रूप से पूरा हो जाएगा, लेकिन हमेशा यह भरोसा दिलाया कि जनहित के कार्यों को पूरा करने के लिए पूरी ईमानदारी, निष्ठा और प्रतिबद्धता के साथ प्रयास अवश्य किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जनता को जब यह विश्वास होता है कि उसका प्रतिनिधि उसके हितों के लिए निरंतर प्रयास कर रहा है, तो यही विश्वास लोकतंत्र को मजबूत करता है।

विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि जनता को अपने प्रतिनिधि पर यह भरोसा होना चाहिए कि वह उनके हितों की रक्षा करेगा और किसी भी परिस्थिति में उनका अहित नहीं होने देगा। जनप्रतिनिधियों के प्रति जनता की अपेक्षाएं स्वाभाविक रूप से अधिक होती हैं। इन अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए निरंतर प्रयास करना हमारा कर्तव्य भी है और लोकतंत्र द्वारा दिया गया महत्वपूर्ण दायित्व भी।

उन्होंने कहा कि विधानसभा की समितियां लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण अंग हैं। कार्यपालिका की इन समितियों के प्रति जवाबदेही तय है। जनहित के विषयों को लेकर अधिकारियों से प्रश्न करना, जानकारी प्राप्त करना और आवश्यक दिशा-निर्देश देना समितियों का अधिकार होने के साथ-साथ उनकी जिम्मेदारी भी है। महाना ने कहा कि जनता ने जनप्रतिनिधियों को केवल पद और प्रभाव बढ़ाने के लिए नहीं चुना है, बल्कि उन्हें जनसेवा का अवसर दिया है। वर्तमान समय तकनीक का युग है और जनप्रतिनिधियों की प्रत्येक गतिविधि जनता की निगाह में रहती है। ऐसे में विधायकों का जागरूक, अध्ययनशील और तकनीकी रूप से सक्षम होना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि ज्ञान और निरंतर अध्ययन के माध्यम से ही जनप्रतिनिधि अपने दायित्वों का बेहतर निर्वहन कर सकते हैं और जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतर सकते हैं।

बिहार विधानसभा सचिवालय, लोकसभा सचिवालय के संसदीय अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान (PRIDE) तथा बिहार सरकार के बिपार्ड के संयुक्त तत्वावधान में 11 एवं 12 जुलाई, 2026 को आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य विधायकों को सदन की कार्यवाही, नियमों, विधायी कार्यों और लोकतांत्रिक जिम्मेदारियों की बेहतर समझ प्रदान करना था। दो दिवसीय इस प्रबोधन कार्यक्रम में भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन, बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन (सेवानिवृत्त), बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, बिहार विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार, बिहार विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / शिव सिंह