मीरजापुर शहर में 58 जर्जर मकानों ने बढ़ायी चिंता, बारिश में बढ़ी ध्वस्त होने की आशंका

 


मीरजापुर, 08 अगस्त (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के जनपद मीरजापुर में बारिश शुरू होते ही शहर के जर्जर मकानों ने खतरे की चिंता बढ़ा दी है। नगर पालिका की सूची में शामिल 58 भवन आबादी के बीच खड़े हैं। इनमें कई की दीवारों में दरारें हैं तो कहीं छत और प्लास्टर कमजोर हो चुके हैं। नगर पालिका ने जून में भवन स्वामियों को नोटिस देकर सावधान तो किया, लेकिन ज्यादातर भवन अब भी खाली नहीं कराए गए हैं। न घेराबंदी हुई और न ही ध्वस्तीकरण की कार्रवाई आगे बढ़ी। ऐसे में तेज बारिश के बीच इन भवनों के आसपास रहने वाले लोगों में हादसे का डर बना हुआ है।

नगर पालिका की ओर से नागरिकों से जर्जर भवनों के आसपास नहीं जाने और उनमें शरण नहीं लेने की अपील की जा रही है। लेकिन सवाल यह है कि जब भवनों को खतरनाक चिह्नित किया जा चुका है तो उन्हें खाली कराने और सुरक्षित करने की ठोस कार्रवाई कब होगी। लोगों का कहना है कि सिर्फ नोटिस देकर जिम्मेदारी पूरी नहीं की जा सकती। नगर पालिका परिषद, मीरजापुर के अधिशासी अधिकारी गोवा लाल ने बताया कि नगर पालिका ने लोगों से अपील की है कि किसी भवन में दरार, झुकाव, प्लास्टर गिरने या दीवार फूलने जैसी स्थिति दिखाई दे तो तत्काल सूचना दें। जर्जर भवनों और कमजोर दीवारों से दूरी बनाए रखें।

पहले हो चुके हैं जानलेवा हादसे

शहर में जर्जर भवनों के गिरने से पहले भी जानें जा चुकी हैं। वर्ष 2025 में बेलतर मोहल्ले में जर्जर मकान गिरने से बुजुर्ग महिला की मौत हुई थी। इससे पहले 28 अप्रैल 2021 की रात करीब ढाई बजे शहर कोतवाली के पास छोटी गुदरी में पुराने मकान की छत ढहने से एक ही परिवार के पांच लोगों की मौत हो गई थी। हादसों के बावजूद शहर के पुराने इलाकों में जर्जर भवनों की समस्या बनी हुई है।

पुराने मोहल्लों में सबसे अधिक चिंता

छोटी गुदरी, बूढ़ेनाथ, त्रिमोहानी, अनगढ़, गिरधर चौराहा, नटवां, बड़ी माता, लालडिग्गी और टटहाई रोड जैसे इलाकों में पुराने और कमजोर भवनों को लेकर लोगों में चिंता है। बारिश के दौरान इन भवनों के और कमजोर होने की आशंका रहती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि हर बरसात में उन्हें मकान गिरने का डर सताता है।

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हिन्दुस्थान समाचार / गिरजा शंकर मिश्रा