सात समंदर पार सूरीनाम हेरिटेज फेस्टिवल में भारत के लोक-सांस्कृतिक की प्रस्तुति

 


वाराणसी, 07 सितम्बर (हि.स.)। लोकगायिक सरोज वर्मा ने सोमवार को वाराणसी में अपने कार्यालय पर पत्रकारों को बताया कि भारत और सूरीनाम के जीवंत सांस्कृतिक संबंधों की एक सांगीतिक यात्रा सम्पन्न हुई। वाराणसी की 10 सदस्यीय भारतीय सांस्कृतिक दल ने सूरीनाम (दक्षिण अमेरिका) की सांस्कृतिक यात्रा की। भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद के माध्यम से आमंत्रित इस दल को भारत की भोजपुरी लोकसंगीत एवं लोकनृत्य परंपरा का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिला।

सरोज वर्मा ने कहा कि सूरीनाम की सांस्कृतिक पहचान को आकार देने वाले विभिन्न समुदायों की परंपराओं को एक साथ प्रस्तुत किया गया। इनमें हिंदुस्तानी, अफ्रीकी एवं मैरून, जावानीज़, चीनी और डच समुदायों की सांस्कृतिक विरासत प्रमुख थी। भारतीय दल की सहभागिता इस प्रथम संस्करण में विशेष रूप से महत्वपूर्ण रही, क्योंकि भोजपुरी लोकगीत और लोक नृत्य के माध्यम से भारत की उत्तर भारतीय लोक परंपरा को इस बहुसांस्कृतिक आयोजन का हिस्सा बनने का अवसर मिला।

माता गौरी की प्रस्तुति से की गई शुरूआत

दल की प्रस्तुतियों की शुरुआत माता गौरी में हुई। साथ ही भोजपुरी लोकगीत एवं लोकनृत्य की प्रस्तुति दी गई। सरोज वर्मा ने कजरी, सोहर, विवाह गीत और भजन सहित विभिन्न लोक विधाओं को प्रस्तुत किया। पांच संगीतकारों और चार लोक नर्तकों ने संगीत एवं नृत्य के माध्यम से इन लोक परंपराओं को मंच पर प्रस्तुत किया। इसके बाद स्वामी विवेकानंद कल्चरल सेंटर ने प्रस्तुति दी। यहां भोजपुरी लोकसंगीत और लोकनृत्य के माध्यम से उत्तर भारत की लोक परंपराओं को प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम में स्थानीय दर्शकों की सहभागिता और इन लोकगीतों के प्रति उनकी रुचि विशेष रूप से देखने को मिली।

इसी क्रम में प्लेटिनम दल ने प्रस्तुति दी। यह आयोजन सूरीनाम की बहु सांस्कृतिक विरासत के विभिन्न रंगों के बीच भारतीय लोकसंगीत और लोकनृत्य को प्रस्तुत करने का एक विशेष अवसर रहा। इसी तरह निकेरि दल ने प्रस्तुति के साथ-साथ स्थानीय समुदाय से मिलने और वहाँ के सामाजिक एवं सांस्कृतिक जीवन को करीब से जानने का अवसर मिला।

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हिन्दुस्थान समाचार / शरद