कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भरता भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका : सूर्य प्रताप शाही

 






प्रयागराज में संयुक्त मंडलीय खरीफ उत्पादकता गोष्ठी सम्पन्न, किसानों की समस्याओं के समाधान पर जोर

प्रयागराज, 06 जून (हि.स.)। कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भरता भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उक्त बात शनिवार को मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एमएनएनआईटी) के एमपी हॉल में प्रयागराज, वाराणसी एवं विंध्याचल मंडल की संयुक्त मंडलीय खरीफ उत्पादकता समीक्षा गोष्ठी-2026 कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश सरकार के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कही।

उन्होंने कहा कि ऐसी गोष्ठियों का उद्देश्य किसानों के सुझाव प्राप्त करना, उनकी समस्याओं को सुनना और उनके समाधान की दिशा में प्रभावी कदम उठाना है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए लगातार प्रयासरत है। फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में वृद्धि की गई है और अब सरकार स्वयं किसानों से फसलों की खरीद सुनिश्चित कर रही है। उन्होंने बताया कि धान का समर्थन मूल्य 1310 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़ाकर 2385 रुपये प्रति क्विंटल किया गया है। मौसम विभाग द्वारा इस वर्ष सामान्य से कम वर्षा की संभावना जताए जाने पर कृषि मंत्री ने किसानों को कम पानी वाली फसलों जैसे उड़द, मूंग, चना, अरहर और मूंगफली की खेती को बढ़ावा देने की सलाह दी।

उन्होंने किसानों से प्राकृतिक खेती अपनाने, फसल चक्र का पालन करने और फार्मर रजिस्ट्री अनिवार्य रूप से कराने का आह्वान किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्रमुख सचिव (कृषि) ने किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड के आधार पर उर्वरकों का संतुलित प्रयोग करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से भूमि की उर्वरता और स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है। किसानों को ड्रिप सिंचाई, स्प्रिंकलर और जैविक खेती जैसी आधुनिक एवं टिकाऊ कृषि तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।

कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने सर्व प्रथम कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन तथा एक पेड़ मां के नाम अभियान के तहत पौधरोपण कर किया। गोष्ठी में खरीफ सीजन की तैयारियों, कृषि रणनीतियों और किसानों की समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की गई।

गोष्ठी में विभिन्न जनपदों से आए किसानों ने केसीसी, सिंचाई, बिजली, सोलर पंप, प्राकृतिक खेती, नहरों की मरम्मत और फसलों के उचित मूल्य जैसी समस्याओं को उठाया। संबंधित विभागों के अधिकारियों ने समस्याओं के समाधान के लिए आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया।

इस अवसर पर कृषि यंत्रीकरण योजनाओं के अंतर्गत कई किसानों को अनुदान राशि, ड्रोन, कस्टम हायरिंग सेंटर की चाबियां, बीज मिनीकिट और आईपीएम किट वितरित किए गए। कार्यक्रम में तीनों मंडलों के मंडलायुक्त, मुख्य विकास अधिकारी, कृषि वैज्ञानिक, विभागीय अधिकारी तथा बड़ी संख्या में प्रगतिशील किसान उपस्थित रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / रामबहादुर पाल