उप्र में 10 आईपीएस, आठ पीपीएस अफसर हुए सेवानिवृत्त
लखनऊ, 31 अगस्त (हि.स.)। उत्तर प्रदेश पुलिस विभाग में सोमवार को 10 आईपीएस, आठ पीपीएस अफसर सेवानिवृत्त हो गये है। पुलिस मुख्यालय में इन अफसरों को विदाई कार्यक्रम आयोजित हुआ, जिसमें पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) राजीव कृष्ण ने स्मृति चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया।
सेवानिवृत्त आईपीएस अफसरों में डीजीपी फायर सर्विसेज मुथा अशोक जैन, बीपीआर एड डी के एडीजी रवि जोसेफ लोक्कू, सीआईडी के आईजी डॉ. अखिलेश कुमार निगम, यूपी 112 डीआईजी शहाब रशीद खान, पुलिस कमिश्ररेट के डीआईजी आलोक प्रियदर्शी, डीआईजी पीएसी मुख्यालय से सुनीता सिंह, पुलिस अधीक्षक एसपी कमलेश कुमार दीक्षित, ईओडब्ल्यू के एसपी अरविंद मिश्रा, ट्रेनिंग मुख्यालय एसपी हरि गोविंद, पीएसी की 49वीं वाहिनी के एसपी राम नयन सिंह का नाम शामिल है। इनके अलावा आठ पीपीएस अधिकारियों ने जो अपनी सेवा पूरी की है उनमें एडिशनल एसपी बलरामाचारी दुबे और अशोक कुमार वर्मा, एटीएस के डीएसपी लायक सिंह, 44वीं पीएसी के डीएसपी अंजू सिंह, पीआर एंड पीबी की डीएसपी अस्मा माजिद, सीबीसीआईडी मुख्यालय के डीएसपी धीरेंद्र प्रताप सिंह, फतेहपुर के डीएसपी प्रमोद कुमार शुक्ला और प्रतापगढ़ के डीएसपी अनिल कुमार राय आज सेवानिवृत्त हुए।
सेवानिवृत्त होने के बाद मुथा अशोक जैन, डा0 अखिलेश कुमार निगम, शहाब रशीद खॉ, आलोक प्रियदर्शी, सुनीता सिंह, कमलेश कुमार दीक्षित, अरविन्द मिश्र, हरि गोवन्द एवं राम नयन सिंह ने अपने-अपने सम्बोधन में उत्तर प्रदेश पुलिस के प्रति आभार व्यक्त करते हुये उत्तर प्रदेश पुलिस में सेवा करने को अपने जीवन का गौरवपूर्ण अनुभव बताया तथा पुलिस विभाग में बिताये हुये पलों एवं अनुभवों को साझा किया गया।
इस अवसर पर डीजीपी ने कार्यक्रम के दौरान अपने संबोधन में सेवानिवृत्त हो रहे सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों तथा उनके परिजनों को सम्पूर्ण उत्तर प्रदेश पुलिस परिवार की ओर से हार्दिक शुभकामनाएँ एवं बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह एक अद्भुत संयोग है कि अलग-अलग परिवारों से निकलकर, शिक्षा-दीक्षा प्राप्त करने के बाद पुलिस सेवा को अपने कैरियर के रूप में चुनने वाले आप सभी अधिकारी एवं कर्मचारी सेवा के विभिन्न पड़ावों पर एक-दूसरे से जुड़े और आज एक ही दिन विभाग से सेवानिवृत्त हो रहे हैं। आप सभी ने 30 से 35 वर्ष अथवा उससे अधिक की दीर्घ सेवा के दौरान राष्ट्र, समाज, आमजन तथा उत्तर प्रदेश पुलिस के प्रति उल्लेखनीय एवं असाधारण योगदान दिया है।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में अनेक प्रकार के अनुभव आते हैं। कभी सफलता के, कभी चुनौतियों के, कभी उपलब्धियों के, तो कभी कठिन परिस्थितियों के यही अनुभव जीवन की सबसे बड़ी सीख बनते हैं। ये अनुभव व्यक्ति को निरंतर सीखने, स्वयं को बेहतर बनाने और परिस्थितियों का सामना करने की क्षमता प्रदान करते हैं। समय के साथ यही अनुभव हमारे व्यक्तित्व को परिपक्व बनाते हैं और अंततः जीवन की सबसे मूल्यवान एवं यादगार पूंजी बन जाते हैं।
डीजीपी ने कहा कि सेवानिवृत्ति का अर्थ किसी व्यक्ति की कार्य करने की क्षमता, ऊर्जा अथवा प्रतिभा का समाप्त हो जाना नहीं है, बल्कि यह जीवन की एक नई शुरुआत है। सेवा के दौरान प्राप्त अनुभव, दक्षता और ज्ञान जीवन की अमूल्य पूंजी हैं, जिनका उपयोग समाज और स्वयं के लिए आगे भी किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि मुझे पूरा विश्वास है कि विभागीय एवं सरकारी नियमों के कारण सेवा काल में जो प्रोजेक्ट, सपने अथवा आकांक्षाएं अधूरी रह गईं, उन्हें आप अपनी ‘सेकंड इनिंग’ में अपने अनुभव, प्रतिभा, ऊर्जा और नई सोच के साथ पूरा करेंगे। यह नया चरण आपके लिए स्वयं को समय देने, अपने अधूरे सपनों को पूरा करने तथा परिवार और समाज के साथ नई ऊर्जा एवं उत्साह के साथ जीवन को आगे बढ़ाने का अवसर होगा। उन्होने अन्त में सेवानिवृत्त हो रहे सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के सुखमय, स्वस्थ, समृद्ध एवं सफल होने की कामना की ।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / दीपक