शिक्षकों को अपने पढ़ाने के तरीके में नित नये प्रयोग करना चाहिए : डॉ. स्मर्णिका त्रिपाठी
-ईश्वर शरण पीजी कॉलेज में शुरू हुआ बहु-विषयक पुनश्चर्या कार्यक्रम
प्रयागराज, 04 फ़रवरी (हि.स.)। ईश्वर शरण पीजी कॉलेज, प्रयागराज के यूजीसी-मालवीय मिशन टीचर्स ट्रेनिंग सेंटर की ओर से मानविकी और सामाजिक विज्ञान की नई प्रवृत्तियों और अवधारणाओं पर पंद्रह दिवसीय बहु विषयक पुनश्चर्या कार्यक्रम का आज शुभारम्भ हुआ। केंद्र के निदेशक और कॉलेज के प्राचार्य प्रो. आनंद शंकर सिंह ने कहा कि देश भर से शामिल इस बौद्धिक समागम में प्रतिभागियों को यह बहु विषयक पुनश्चर्या कार्यक्रम उनके शिक्षण और शोध में बेहतरी हेतु गहन दृष्टि और समझ प्रदान करेगा।
उन्होंने कहा कि मानविकी और सामाजिक विज्ञान के क्षेत्र में आ रही नवीनतम शोध दृष्टि भारतीय परम्पराओं और वैश्विक जरूरतों के मुताबिक विद्यार्थियों को विकसित भारत के लक्ष्य हेतु तैयार करने में समर्थ है। इस पुनश्चर्या कार्यक्रम के उद्घाटन अवसर पर केंद्र के सहायक समन्वयक डॉ मनोज कुमार दुबे ने विगत आठ वर्षों में केंद्र द्वारा शिक्षक प्रशिक्षण के क्षेत्र में दर्ज की गई उपलब्धियों का ब्यौरा प्रस्तुत किया।
पंद्रह दिवसीय इस बहु विषयक पुनश्चर्या कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में ‘क्लासरूम से परे :उच्च शिक्षा में छात्र व्यवहार की समझ, प्रेरणात्मक और भावनात्मक बाधाएं’ विषय पर मणिपाल अस्पताल, कोलकाता से जुड़ी कंसल्टेंट क्लिनिकल और रिहैबिलिटेशन साइकोलॉजिस्ट डॉ. स्मर्णिका त्रिपाठी ने मुख्य वक्तव्य देते हुए कहा कि शिक्षक-छात्र सम्बंध आज के तकनीकी युग में परस्परता बोध से जुड़ा होना चाहिए। शिक्षक को विद्यार्थी के सीखने की प्रक्रिया में आ रही भावनात्मक बाधाओं के निराकरण हेतु उसके मन को भी पढ़ना होगा, उसके व्यक्तिगत समस्याओं को दूर करने के लिए उसकी बातों को सुनने और उसे शिक्षक से प्रश्न पूछने के लिए प्रेरित करना होगा। उन्होंने कहा कि शिक्षक मनोवैज्ञानिक रूप से छात्र को सबसे अधिक संबल और उसके मानसिक स्वास्थ्य को सकारात्मक दिशा दे सकता है। उन्होंने कहा कि क्लासरूम अध्यापन में आ रही समस्याओं, विद्यार्थियों की अनुपस्थिति के पीछे शिक्षण का तरीका भी जिम्मेदार हो सकता है। इसलिए शिक्षकों को अपने पढ़ाने के तरीके में नित नवीन प्रयोग करना चाहिए और विषय को आसान भाषा में, कहानियों और प्रयोगों के जरिए सम्प्रेषित करने की कोशिश करनी चाहिए।
दूसरे सत्र में ‘लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम (एलएमएस) और गूगल क्लासरूम’ पर भावनगर विश्वविद्यालय, गुजरात के अंग्रेजी विभाग के प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष प्रो. दिलीप पी. बराड़ ने कहा कि एलएमएस मौजूदा दौर में शिक्षण के क्षेत्र में एक तकनीकी क्रांति की तरह है जिससे पाठ्यक्रम प्रबंधन, छात्र प्रबंधन, मूल्यांकन और ग्रेडिंग, संचार और सहयोग में सुविधा होती है। यह व्यवस्था विद्यार्थियों के लिए एक लचीला वातारण प्रदान करती है जिससे ज्ञान तक उनकी पहुंच सहज हो जाती है। यह सीमित संसाधनों में भी विद्यार्थियों को सहूलियत प्रदान करता है।
मनोज दुबे ने बताया कि इस पंद्रह दिवसीय कार्यक्रम में देश भर से मानविकी और सामाजिक विज्ञान के विभिन्न विषयों के 23 राज्यों के ढाई सौ शिक्षक प्रतिभागी शामिल हो रहे हैं। पुनश्चर्या कार्यक्रम में उपस्थिति अतिथियों और वक्ताओं का स्वागत एवं परिचय कार्यक्रम की संयोजक डॉ. शाइस्ता इरशाद ने और धन्यवाद ज्ञापन सह संयोजक डॉ अंकित पाठक ने किया।
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हिन्दुस्थान समाचार / विद्याकांत मिश्र