शिक्षा व्यवस्था को सदैव समाज की आवश्यकताओं के अनुरूप होना चाहिए उत्तरदायी : कुलाधिपति
वाराणसी, 25 मई (हि. स.)। अंतर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केंद्र में फ्रॉम डेटा टू इनसाइट्स: स्टैटिस्टिकल एनालिसिस विद फ्री एंड एआई-ड्रिवन टूल्स विषय पर छह दिवसीय शॉर्ट टर्म संगोष्ठी में राष्ट्रीय शैक्षिक योजना एवं प्रशासन संस्थान के कुलाधिपति प्रो. रामा शंकर दुबे ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को सदैव समाज की आवश्यकताओं एवं बदलती परिस्थितियों के अनुरूप उत्तरदायी होना चाहिए।
शिक्षकों एवं संकाय सदस्यों को इस प्रकार सशक्त बनाया जाना आवश्यक है कि वे विद्यार्थियों को वैश्विक स्तर की दक्षताओं एवं प्रतिस्पर्धात्मक क्षमताओं से युक्त कर सकें। गणित प्राचीन काल से ही भारतीय समाज एवं ज्ञान परंपरा का अभिन्न अंग रहा है। समय-समय पर विश्व ने अनेक तकनीकी परिवर्तनों को देखा है और वर्तमान युग कृत्रिम बुद्धिमत्ता तथा आँकड़ा -आधारित तकनीकों का युग है। ऐसे में शिक्षकों, शोधकर्ताओं एवं विद्यार्थियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता तथा अन्य आधुनिक डिजिटल उपकरणों का प्रभावी उपयोग करते हुए आँकड़ों को समझने, उनका विश्लेषण करने तथा उनसे सार्थक निष्कर्ष निकालने की क्षमता विकसित करनी चाहिए।
संगोष्ठी का शुभारंभ आईयूसीटीई के सहायक प्राध्यापक डॉ. राजा पाठक के मंगलाचरण से हुआ। इसके उपरांत दीप प्रज्वलन एवं माँ सरस्वती तथा महामना पंडित मदन मोहन मालवीय की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की गई। संगोष्ठी में राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद, नई दिल्ली के प्रो. गौरव सिंह ने भी अपना विषय रखा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. प्रेम नारायण सिंह, निदेशक, आईयूसीटीई ने की।
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हिन्दुस्थान समाचार / शरद