दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के अंग्रेज़ी विभाग में दो-दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी 10–11 को
गोरखपुर, 09 अप्रैल (हि.स.)। वैश्विक परिप्रेक्ष्य में दक्षिण एशिया की मौखिकता और स्वदेशी ज्ञान प्रणालियां” विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है। इस संगोष्ठी में देशभर से प्रतिष्ठित विद्वान, शोधार्थी एवं अकादमिक विशेषज्ञ सहभागिता करेंगे तथा समकालीन वैश्विक संदर्भ में स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों की बदलती प्रकृति पर विचार-विमर्श करेंगे।
संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. पूनम टंडन करेंगी। वे अपने उद्बोधन में आधुनिक शैक्षणिक विमर्श में पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों के समावेशन के महत्व पर प्रकाश डालेंगी। मुख्य वक्तव्य प्रख्यात साहित्यिक आलोचक एवं सांस्कृतिक चिंतक प्रो. जी. एन. देवी द्वारा प्रस्तुत किया जाएगा, जो महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय, बड़ौदा के पूर्व अंग्रेज़ी प्रोफेसर रहे हैं। स्वदेशी भाषाओं एवं संस्कृतियों पर उनके महत्वपूर्ण कार्य के कारण उनका व्याख्यान संगोष्ठी की बौद्धिक दिशा निर्धारित करेगा।
इस अवसर पर अनेक विशिष्ट विद्वान अपने विचार साझा करेंगे, जिनमें प्रो. नंदिनी साहू (कुलपति, हिंदी विश्वविद्यालय, कोलकाता), प्रो. एम. सी. बेहरा (जनजातीय अध्ययन विशेषज्ञ), प्रो. हेमेन्द्र सिंह चंडालिया (स्वदेशी अध्ययन के विद्वान) तथा प्रो. अंजलि दैमरी (गौहाटी विश्वविद्यालय) शामिल हैं। इनके व्याख्यान मौखिक परंपराओं, सांस्कृतिक संप्रेषण, ज्ञानमीमांसीय न्याय तथा वैश्वीकरण के संदर्भ में स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों के रूपांतरण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर केंद्रित होंगे।
आयोजकों के अनुसार, संगोष्ठी को व्यापक प्रतिसाद प्राप्त हुआ है। इसमें 200 से अधिक शोध-पत्र ऑफ़लाइन एवं ऑनलाइन माध्यम से प्रस्तुत किए जाएंगे। इन शोध-पत्रों में स्वदेशी कथात्मक परंपराएं, दलित एवं आदिवासी ज्ञान मीमांसा, पारिस्थितिक ज्ञान प्रणालियां तथा मौखिक संस्कृतियों के संरक्षण में डिजिटल माध्यमों की भूमिका जैसे विविध विषय शामिल हैं।
संगोष्ठी की संयोजक प्रो. सुनीता मुर्मू ने इस आयोजन को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि यह कार्यक्रम स्वदेशी अध्ययन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण हस्तक्षेप सिद्ध होगा तथा नए शोध एवं सहयोग के अवसर प्रदान करेगा। सह-संयोजक प्रो. गौरहरि बेहरा ने संगोष्ठी के अंतःविषय स्वरूप पर बल देते हुए कहा कि यह आयोजन साहित्य, मानव विज्ञान, सांस्कृतिक अध्ययन एवं पर्यावरणीय मानविकी के बीच सार्थक संवाद स्थापित करेगा। आयोजन सचिव डॉ. अमोद कुमार राय ने बताया कि प्रतिभागियों की सुविधा हेतु सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित कर ली गई हैं।
परंपरा, संप्रेषण एवं रूपांतरण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर केंद्रित यह संगोष्ठी समकालीन वैश्विक चुनौतियों के संदर्भ में स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों की प्रासंगिकता को समझने एवं उन्हें आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान देगी।
हिन्दुस्थान समाचार / प्रिंस पाण्डेय