सीएसजेएमयू में पर्यावरण, समानता और सतत विकास पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन शुरू
कानपुर, 22 मई (हि.स.)। वर्तमान समय में शिक्षा व्यवस्था को तकनीकी परिवर्तनों के अनुरूप ढालना अत्यंत आवश्यक है। शोधार्थियों को पर्यावरण, सतत विकास और शिक्षा सुधार जैसे विषयों पर गंभीरता से शोध करना चाहिए। यह बातें शुक्रवार को छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने कही।
सीएसजेएमयू के शिक्षा विभाग द्वारा “लर्निंग फॉर टुमारो: इंटीग्रेटिंग एनवायरमेंट, इक्विटी एंड सस्टेनेबिलिटी थ्रू एजुकेशन” विषय पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन सेनानायक तात्या टोपे सीनेट हॉल में किया गया। सम्मेलन में सतत विकास, पर्यावरण संरक्षण, शिक्षा सुधार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, भारतीय ज्ञान परंपरा तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 जैसे विषयों पर चर्चा हुई।
मुख्य अतिथि प्रो. अमिताभ मिश्रा ने परिणाम आधारित शिक्षा, अनुभवात्मक अधिगम और कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भूमिका पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों में आलोचनात्मक चिंतन विकसित करने के लिए शिक्षकों को बेहतर शिक्षण वातावरण तैयार करना चाहिए।
कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने वैश्विक तापवृद्धि को गंभीर चिंता बताते हुए शिक्षा व्यवस्था को तकनीकी बदलावों के अनुरूप विकसित करने पर जोर दिया। प्रति कुलपति प्रो. सुधीर कुमार अवस्थी ने आत्मनिर्भर विश्वविद्यालयों, सामाजिक न्याय और योग्य शिक्षकों की भूमिका पर अपने विचार रखे।
विशिष्ट अतिथि प्रो. प्रवीण तिवारी ने पर्यावरणीय संकट, कार्बन उत्सर्जन और सतत विकास मॉडल पर चर्चा करते हुए स्मार्ट विलेज विकसित करने की आवश्यकता बताई। वहीं प्रो. कौशल किशोर ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत शिक्षा में रचनात्मकता और आलोचनात्मक चिंतन को बढ़ावा देने पर बल दिया।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. रत्नार्थु मिश्रा ने किया जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. रश्मि गोरे ने दिया। सम्मेलन में विभिन्न राज्यों के 150 से अधिक छात्र-छात्राओं ने शोध पत्र प्रस्तुत किए।
हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप