धूम्रपान छोड़ने से कैंसर का खतरा हो जाता है कम : डा.वेद प्रकाश
लखनऊ, 30 मई (हि.स.)। भारत में तंबाकू के सेवन से प्रतिवर्ष लगभग 13 लाख मौतें होती हैं। किसी भी उम्र में तंबाकू छोड़ने से कैंसर, हृदय रोग, स्ट्रोक और दीर्घकालिक फेफड़ों की बीमारी का खतरा काफी कम हो जाता है। गर्भावस्था के दौरान धूम्रपान करने से गर्भपात, समय से पहले जन्म, कम वजन वाले शिशु का जन्म और शिशु मृत्यु सिंड्रोम का खतरा बढ़ जाता है। यह जानकारी किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के पल्मोनरी एंड क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष डा. वेद प्रकाश ने शनिवार को दी।
डा.वेद प्रकाश ने केजीएमयू में आयोजित प्रेसवार्ता में बताया कि धूम्रपान छोड़ने के 20 मिनट के भीतर हृदय गति और रक्तचाप में सुधार होने लगता है। छोड़ने के 01 वर्ष के भीतर, हृदय रोग का खतरा लगभग 50 प्रतिशत तक कम हो जाता है। 5-10 वर्षों के भीतर, स्ट्रोक और कई प्रकार के कैंसर का खतरा काफी कम हो जाता है।
डा. वेद प्रकाश ने बताया कि प्रत्येक वर्ष 31 मई 2026 को, विश्व तंबाकू निषेध दिवस वैश्विक स्तर पर मनाया जाता है ताकि तंबाकू के सेवन के नकारात्मक प्रभावों के बारे में जागरूकता पैदा की जा सके और लोगों को स्वस्थ जीवन जीने के लिए प्रेरित किया जा सके।
इस वर्ष, 2026 में, विश्व तंबाकू निषेध दिवस का थीम है “लुभावने विज्ञापन होंगे उजागर – निकोटीन और तंबाकू की लत के खिलाफ संघर्ष”। यह विषय उजागर करेगा कि कैसे तंबाकू और निकोटीन उद्योग बच्चों और किशोरों को आकर्षित करने के लिए उत्पादों (ई-सिगरेट, निकोटीन पाउच और इसी तरह के उत्पादों सहित) को पुनः पैक करके उनका प्रचार करता है।
धूम्रपान और तंबाकू सेवन स्वास्थ्य को कैसे प्रभावित करते हैं?
डा.वेद प्रकाश ने बताया कि केजीएमयू का पल्मोनरी एंड क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग व्यापक रोगी देखभाल, परामर्श सेवाओं, जन जागरूकता पहलों और साक्ष्य-आधारित उपचार रणनीतियों के माध्यम से तंबाकू नियंत्रण और धूम्रपान समाप्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। विभाग नियमित रूप से सीओपीडी, फेफड़ों के कैंसर, अस्थमा, इंटरस्टिशियल पल्मोनरी की बीमारी, नींद संबंधी विकार और अन्य तंबाकू संबंधी बीमारियों से पीड़ित रोगियों के लिए धूम्रपान समाप्ति परामर्श आयोजित करता है।
हिन्दुस्थान समाचार / बृजनंदन